Gold Investment: सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक ये सोचने में लगे हुए हैं कि क्या सोने और चांदी में आगे उछाल आएगा या फिर ये और टूट सकते हैं. इसे लेकर एक नई रिपोर्ट आई है, गोल्ड प्राइस आगे भी मजबूत होने की बात कही गई है. इसके साथ ही इसमें तेजी के पीछे का बड़ा चीन कनेक्शन भी बताया गया है.
गोल्ड को लेकर सेंटीमेंट पॉजिटिव
गोल्ड की कीमतों में बीते साल की तेजी 2026 के पहले महीने जनवरी के आखिर तक देखने को मिली थी. बीते 29 जनवरी को ही एमसीएक्स पर जहां सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के शिखर पर पहुंच गया था, तो वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत पहली बार 5000 डॉलर प्रति औंस को पार कर गई थी. हालांकि, इस साल की शुरुआती तेजी के बाद आई तेज गिरावट के बावजूद एक्सपर्ट सोने की कीमतों को अच्छा समर्थन मिलने की उम्मीद जता रहे हैं.
बिकवाली के बाद भी सोने में दम
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स की 10 फरवरी को जारी नई गोल्ड रिपोर्ट को देखें, तो जनवरी में आई जबर्दस्त अस्थिरता के कारण सोने की लगभग आधी बढ़त खत्म हो गई, लेकिन इसके बावजूद गोल्ड की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस स्थिर हो गई है. जनवरी में लंदन स्पॉट मार्केट में गोल्ड रेट रिकॉर्ड 5,594 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए थे, लेकिन महीने के अंत में भारी बिकवाली भी देखने को मिली. कीमतों में गिरावट में अहम रोज भू-राजनीतिक तनाव में आई कमी ने निभाया. इस गिरावट के बाद भी NSE और Share दोनों बाजारों में कीमतें 5,000 डॉलर से ऊपर बनी हुई हैं और मासिक आधार पर 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज कर रही हैं, जो मजबूत डिमांड की ओर इशारा करती है.
गोल्ड कीमत को समर्थन दे रही डिमांड
सोने के आउटलुक को मजबूत करने का एक प्रमुख आधार इसमें निवेश का लगातार बढ़ना है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सोने की कुल ग्लोबल डिमांड पहली बार 5,000 टन से अधिक हो गई, जिससे कुल बाजार मूल्य 555 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है. गोल्ड में निवेश ने इस इजाफे में बड़ा रोल निभाया. वैश्विक गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड में सोने की हिस्सेदारी 801 टन बढ़ी, जो रिकॉर्ड में दूसरी सबसे मजबूत सालाना बढ़त रही. सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग भी 12 साल के हाई लेवल पर पहुंच गई, जो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती डिमांड को दर्शाती है. इसमें आगे भी तेजी की संभावना के पीछे के बड़े कारण भी हैं.
चीन समेत सेंट्रल बैंकों की खरीद
गोल्ड रेट में बढ़ोतरी के पीछे दुनियाभर के केंद्रीय बैंक की खरीदारी भी अन्य महत्वपूर्ण सहायक कारक बनी हुई है. 2025 में रिपोर्ट की गई सेंट्रल बैंकों की नेट खरीद 328 टन रही, जो 2024 के स्तर से मामूली रूप से कम है. खास तौर पर सोने की कीमतों में बढ़ोतरी में चीन का बड़ा रोल देखने को मिला है, क्योंकि चीन के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (च्मवचसमे ठंदा व्ि ब्ीपदं) ने जनवरी में लगातार 15वें महीने सोने की खरीद जारी रखी, जिससे कीमतों को सहारा देने में सरकारी क्षेत्र की मांग की भूमिका और भी मजबूत नजर आई.
यह भी पढ़ें : 10000 रुपये सस्ती हुई चांदी, निवेशक बरतें सावधानी
अभी रुकने वाला नहीं है सोना!
रिपोर्ट में ये तमाम कारण बताते हुए अनुमान लगाया गया है कि सोने की कीमतें शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में रह सकती है, लेकिन मिड और लॉन्गटर्म में इनमें तेजी की उम्मीद है. ळसवइंस ज्मदेपवद में कमी से इसकी रफ्तार धीमी हो सकती है, लेकिन केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार खरीद के साथ ही ईटीएफ में जोरदार निवेश इसे मजबूती देते नजर आ रहे हैं. एनालिस्ट का मानना है कि मुनाफावसूली का मौजूदा दौर समाप्त होने के बाद कमोडिटी मार्केट का फोकस फिर से इन कारकों पर वापस आएगा और इससे सोने की भूमिका और मजबूत होगी.
यह भी देखें : कैब ड्राइवर का अपहरण करने की कोशिश, जांच में जुटी पुलिस।



