Loss : बाढ़ की आपदा से नेपाल में हजारों की जान गई है तो पड़ोसी देश भारत पर भी इस विपदा का असर पड़ा है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों से इस पहाड़ी देश के साथ करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, जो इस समय लगभग ठप हो गया है। नेपाल में पर्यटन का सीजन शुरू हो रहा है, जब काफी भारतीय सैलानी वहां जाते हैं मगर हादसों की आशंका में पर्यटक बुकिंग रद्द करा रहे हैं। काठमांडू तथा पोखरा जैसे लोकप्रिय गंतव्यों का रुख करने वाले पर्यटकों की तादाद न के बराबर रह गई है।
कारोबार प्रभावित
नेपाल में सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण मालवाहक वाहनों की आवाजाही बाधित हुई है। इससे भारतीय निर्यातकों और ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। नेपाल की सीमा से सटे टनकपुर, पीलीभीत और बरेली से करोड़ों रुपये का माल वहां जाता है। राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि बरेली से नेपाल को हर महीने करीब 10 करोड़ रुपये का सामान निर्यात होता है मगर आपदा के कारण इस पर बहुत असर पड़ा है। नेपाल के व्यापारियों ने कई पुराने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं या माल कुछ समय रुककर भेजने को कहा है। उनकी आपूर्ति आगे बढ़ा दी है।
ट्रक फंसे, कारोबारियों को नुकसान
गुप्ता के मुताबिक नेपाल के व्यापारी माल खरीदने अक्सर बरेली आते हैं और यहां से मसाले, खाद्य तेल, चीनी, आटा, चावल, दाल तथा लोहे का सामान नेपाल भेजा जाता है। बाढ़ की वजह से नेपाल के मैदानी और पहाड़ी इलाकों से संपर्क काफी कट गया है, जिससे माल भी नहीं जा रहा है। बरेली से टनकपुर होते हुए नेपाल के महेंद्रनगर बॉर्डर तक की दूरी करीब 110 किलोमीटर है और दोनों देशों के बीच माल की ज्यादातर आवाजाही इसी रास्ते से होती है। मगर बरेली के ट्रांसपोर्टर राम कृष्ण शुक्ला ने बताया कि नेपाल में बाढ़ की वजह से कई ट्रक रास्ते में फंसे हैं। ट्रक खड़े रहने से ट्रांसपोर्टरों पर बेजा खर्च पड़ रहा है और नुकसान हो रहा है।
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