Moong : किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने मूंग की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,780 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया है, लेकिन मंडियों में किसानों को महज 5,500 से 7,500 रुपए प्रति क्विंटल तक ही भाव मिल रहा है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 1,280 से 3,280 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडियों में पहुंचा 45 हजार क्विंटल मूंग
रामपाल जाट के मुताबिक प्रदेश की मंडियों में मूंग की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू होने के कोई संकेत नहीं हैं। किशनगढ़, केकड़ी और मेड़ता की मंडियों में ही अब तक करीब 45 हजार क्विंटल मूंग की आवक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा बाजार भाव के आधार पर किसानों को अब तक करीब 5.76 करोड़ रुपए से 14.40 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो चुका है। जैसे-जैसे मंडियों में नई फसल की आवक बढ़ेगी, सरकारी खरीद शुरू नहीं होने की स्थिति में किसानों का नुकसान और बढ़ सकता है।
मूंग का MSP 8,780 रुपए, मंडियों में मिल रहे 5,500 से 7,500 रुपए
सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,780 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया है। इसके बावजूद किसानों को मंडियों में 5,500 से 7,500 रुपए प्रति क्विंटल तक ही कीमत मिल रही है।रामपाल जाट ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि किसानों को घोषित मूल्य दिलाना भी सरकारों का “पवित्र धर्म” है।
1 सितंबर से खरीद शुरू करने की लंबे समय से मांग
किसान महापंचायत का कहना है कि पिछले कई वर्षों से किसानों की ओर से मूंग की सरकारी खरीद 1 सितंबर से शुरू करने की मांग की जाती रही है। इसे लेकर राज्य और केंद्र सरकारों को कई बार ज्ञापन भी दिए गए हैं। रामपाल जाट ने बताया कि सरकार के साथ हुई वार्ताओं में भी समय पर खरीद शुरू करने की मांग लगातार उठाई गई, लेकिन इस वर्ष भी मूंग की आवक शुरू होने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है।
नेफेड के पुराने स्टॉक की बिक्री पर भी उठाए सवाल
किसान महापंचायत ने नेफेड की ओर से पिछले वर्षों के भंडारित मूंग को करीब 6,500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचे जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। रामपाल जाट का आरोप है कि यह कीमत मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 2,280 रुपए प्रति क्विंटल कम है। इससे खुले बाजार में मूंग के भाव पर दबाव पड़ रहा है और इसका सीधा नुकसान नई फसल लेकर मंडी पहुंच रहे किसानों को उठाना पड़ रहा है।
भावांतर योजना का विकल्प मौजूद, फिर भी किसानों को राहत नहीं
रामपाल जाट ने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से भावांतर भुगतान योजना भी घोषित की गई है। इसके तहत मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव मिलने पर किसानों के नुकसान की भरपाई का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधे खरीद और भावांतर भुगतान जैसे एक से अधिक विकल्प मौजूद हैं। इसके बावजूद किसानों को घोषित MSP से वंचित होना पड़ रहा है।
‘डबल इंजन सरकार में भी MSP से वंचित किसान’
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकार होने के बावजूद मूंग उत्पादक किसानों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलना दुखद और आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि सरकारें किसानों को समृद्ध बनाने और उनकी आय बढ़ाने की घोषणाएं करती हैं, लेकिन समय पर खरीद नहीं होने से किसानों को अपनी उपज लागत से कम या घोषित समर्थन मूल्य से काफी नीचे बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
खरीद की गारंटी का कानून बनाने की मांग
रामपाल जाट ने कहा कि किसान वर्ष 2010 से न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने और इसके लिए खरीद की गारंटी का कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। किसान महापंचायत ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद तत्काल शुरू की जाए, ताकि किसानों को मंडियों में हो रहे आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
यह भी पढ़ें –भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी, विभिन्न जिलों में चली चुनावी रणनीति
यह भी देखें – जयपुर नगर निगम चुनाव में किसका पलड़ा भारी? किशनपोल विधानसभा के वार्डों का सटीक विश्लेषण


