Dinner Diplomacy : भारत में ब्रिक्स समिट के बीच नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेताओं के बीच वेज और नॉन वेज डिशेज को लेकर बहस छिड गई है। दरअसल राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत में 80 प्रतिशत लोग नॉन-वेजेटेरियन हैं। भारत का नॉन-वेज खाना बहुत स्वादिष्ट होता है।
राहुल के पोस्ट पर रिजिजू ने दिया जवाब
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पोस्ट करते हुए लिखा कि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर था और जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं की झलक थी।
ब्रिक्स नेताओं को वेज डिशेज
जानकारी के अनुसार दरअसल 12 सितंबर को आयोजित डिनर के मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता, गुजराती खांडवी और मिलेट्स का पुलाव रखा गया था। कश्मीर की मशरूम डिश और मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी भी परोसी गई थी।
नॉनवेजेटेरियन का आंकड़ा आधिकारिक नहीं
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत में 80 प्रतिशत नॉनवेजेटेरियन के आंकड़े का कोई सोर्स नहीं बताया। 2023-24 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में मांसाहारी भोजन के सेवन से जुड़ा ऐसा कोई तुलनात्मक आंकड़ा नहीं बताया गया था। हालांकि, 2019 से 2021 के बीच हुए पिछले छथ्भ्ै-5 सर्वेक्षण के अनुसार, 15 से 49 साल की उम्र के 83.4ः पुरुष और 70.6ः महिलाएं कम से कम कभी-कभार मछली, चिकन या मांस खाते थे।
डिनर डिप्लोमेसी की अहमियत
ब्रिक्स समिट जैसे बड़े आयोजनों में डिनर डिप्लोमेसी का मतलब होता है औपचारिक बैठकों और सख्त प्रोटोकॉल से हटकर, रात के खाने की मेज पर अनौपचारिक बातचीत करना। एक साथ खाना खाते हुए नेताओं के बीच का माहौल सहज हो जाता है, जिससे तनाव कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और विवादित मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने में आसानी होती है। कई बार जो मुश्किल समझौते बंद कमरों की औपचारिक चर्चा में नहीं सुलझ पाते, उनकी जमीन ऐसे ही डिनर के दौरान अनौपचारिक बातचीत से तैयार होती है।
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