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UNDP की रिपोर्ट में चेतावनी, युद्व के असर से भारत में बढ़ेगी महंगाई और गरीबी

UNDP report in business

UNDP Report : United State की एक रिपोर्ट में युद्व के कारण भारत में मंहगाई और गरीबी बढने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष और तनाव का असर भारत के आम आदमी की जेब और थाली तक पहुंचने वाला है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ताजा रिपोर्ट मिलिट्री एस्केलेशन इन द मिडिल ईस्ट ने भारत के भविष्य को लेकर एक डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध के कारण भारत के करीब 25 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं।

गरीबी का बढ़ता साया

UNDP ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि युद्ध के कारण ईंधन, माल ढुलाई और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है। भारत में गरीबी बढ़ने का अनुमान पहले 4 लाख था, जो युद्ध की भीषणता के कारण अब 25 लाख तक पहुंच गया है। युद्ध के बाद भारत की गरीबी दर 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 प्रतिशत होने का अनुमान है। यूएनडीपी का मानना है कि दक्षिण एशिया इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जहां कुल 80 लाख लोग गरीबी का शिकार हो सकते हैं।

खेती और भोजन पर बड़ा संकट

UNDP रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अपनी खेती के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, और यह युद्ध चोट कर रहा है। दरअसल भारत अपनी जरूरत का 45 प्रतिशत उर्वरक पश्चिम एशिया से मंगाता है। घरेलू यूरिया उत्पादन भी आयातित गैस पर निर्भर है। जून से मानसून की फसलों की तैयारी शुरू होती है। अगर सप्लाई बाधित रही, तो यूरिया का मौजूदा 61 लाख टन का स्टॉक पर्याप्त नहीं होगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और खाद्य असुरक्षा पैदा होगी। भारत अपनी तेल की जरूरतों का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसमें से 40 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है। एलएलजी की कीमतें बढ़ने के कारण भारत को मजबूरी में कोयले से चलने वाली बिजली पर अपनी निर्भरता बढ़ानी पड़ रही है, जो पर्यावरण के लिए भी ठीक नहीं है।

प्रवासियों के साथ रेमिटेंस को भी लगेगा झटका

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस यानी विदेशों से भेजा जाने वाला धन प्राप्त करने वाला देश है, और इसका एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अक्टूबर 2024 तक खाड़ी देशों में लगभग 93.7 लाख भारतीय रह रहे थे। भारत आने वाले कुल रेमिटेंस का 38-40ः हिस्सा इन्हीं देशों से आता है। युद्ध के कारण वहां आर्थिक गतिविधियां सुस्त हुईं, तो भारतीय परिवारों की आय और क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित होगी।

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ट्रेड और डैडम् सेक्टर पर मार

भारत का 14 % निर्यात और 20.9 % आयात पश्चिम एशियाई बाजारों से जुड़ा है। बासमती चावल, चाय, रत्न-आभूषण और कपड़ों का निर्यात प्रभावित हो रहा है। रत्न, हीरा, स्टील और खाद्य प्रसंस्करण जैसे छोटे उद्योगों को कच्चे माल की कमी और महंगी ऊर्जा का सामना करना पड़ रहा है। इससे छंटनी और काम के घंटों में कटौती का खतरा बढ़ गया है।

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दवाओं और इलाज पर भी असर

युद्ध की तपिश अब अस्पतालों तक पहुंच रही है। होर्मुज जलसंधि में रुकावट के कारण मेडिकल डिवाइस बनाने वाले कच्चे माल की लागत 50ः बढ़ सकती है। दवाओं की थोक कीमतों में पहले ही 10-15ः की बढ़ोतरी देखी जा चुकी है।

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