Traders : हर वित्त वर्ष की हर तिमाही के बाद कंपनियां अपने नतीजों का ऐलान करती हैं। इसके लिए कंपनियों को 45 दिन का विंडो मिलता है। यह समय ज्यादातर रिटेलर्स (Traders) के लिए गतिविधियों से भरा होता है। बाजार में चल रही चर्चा पर वे दांव लगाते हैं। कभी उन्हें खुशी मिलती है तो कभी गम मिलता है। यह रिजल्ट सीजन में पैसे बनाने का स्मार्ट तरीका है। इसमें सिर्फ शेयरों के मोमेंट की जगह ट्रेडर्स के व्यवहार को भी समझना पड़ता है।
रिजल्ट से पहले कैसे काम करती है स्ट्रेटेजी
नतीजे आने से पहले इंस्टीट्यूशंस, एचएनआई और स्मार्ट ट्रेडर्स अपने रिसर्च और एक्सपेक्टेशंस के आधार पर पोजीशन बनाते हैं। ये पोजीशंस इक्विटीज और ऑप्शंस दोनों में दिखते हैं। यही वजह है कि रिजल्ट्स के ऐलान से पहले शेयरों में मूवमेंट दिखने लगता है। ऑप्शंस मार्केट में चीजें अलग तरह से काम करती हैं। एक्सपेक्टेड वोलैटिलिटी, जिसे इंप्लॉयड वोलैटिलिटी भी कहा जाता है, रिजल्ट्स से पहले के दिनों में चढ़ जाता है। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह यह है कि रिजल्ट्स का असर शेयरों की कीमतों पर पड़ता है। इसलिए ऑप्शंस सेलर उस रिस्क को कवर करने के लिए ज्यादा प्रीमियम डिमांड करते हैं। ऑप्शंस बायर्स की डिमांड भी बढ़ जाती है, जिसका मतलब कीमतों में उछाल है। जब रिजल्ट्स का ऐलान होता है तो उम्मीदों का असर पहले से शेयरों पर पड़ चुका होता है। रिजल्ट्स के बाद स्मार्ट मनी एग्जिट कर जाती है, सप्लाई की मार्केट में बाढ़ आ जाती है और रिजल्ट अच्छा होने पर शेयर गिर जाते हैं। ऐसा आपने देखा होगा।
रिटेल ट्रेडर्स से कहां होती है गलती?
जानकारों के अनुसार ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स रिजल्ट के बाद या एक या दो दिन पहले एंटर करते हैं। तब तक रिजल्ट से जुड़ी उम्मीद का असर शेयरों पर पड़ चुका होता है। रिजल्ट्स के उम्मीद के मुताबिक होने पर भी शेयरों में तेजी की बहुत कम गुंजाइश बची होती है। रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं होने पर शेयरों में बड़ी गिरावट आती है। रिजल्ट के ऐलान की तारीख नजदीक होने पर कीमतों पर दांव लगाना स्ट्रेटेजी से ज्यादा सिक्का उछालने जैसा है।
आपको क्या करना चाहिए?
यहां ऑप्शंस से आपको बढ़त मिलती है क्योंकि वे आपको सिर्फ शेयर प्राइस की जगह ट्रेडर्स के विहेबियर पर दांव लगाने का मौका देते हैं।
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रिजल्ट से पहले
आईवी बढ़ने लगता है, जिससे ऑप्शंस प्रीमियम भी बढ़ने लगते हैं। आपको बाइंग साइड में रहना है। अगर स्टॉक की दिशा आपके उलट है तो भी बढ़ता प्ट आपको प्रीमियम को सुरक्षा देता है। ऐसे में स्टॉक के आपके स्टॉपलॉस तक जाने पर भी आपका लॉस ज्यादा नहीं होता है। यह समय एग्रेसिव होने का होता है लेकिन तभी जब रिजल्ट के ऐलान से पहले आप एग्जिट करने का प्लान करते हैं।
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रिजलट्स के बाद
आईवी टूट जाता है। रिजल्ट से पहले पोजीशन बनाने वाले ट्रेडर्स एग्जिट कर जाते हैं। प्रीमियम में तेज गिरावट आती है। तब सेलिंग ऑप्शंस अट्रैक्टिव हो जाता है। अगर आप डायरेक्शनल दांव नहीं लगाना चाहते हैं तो आपको आयरन फ्लाई या आयर कोंडोर का इस्तेमाल करना चाहिए। दोनों स्ट्रेटेजी में प्रीमियम गिरने पर फायदा होता है। अगर आप डायरेक्शनल ट्रेड चाहते हैं तो आप स्प्रेड का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक कॉल खरीदें और एक हायर कॉल बेचें या एक पुट खरीदें और लोअर पुट बेचें। इससे प्रीमियम गिरने पर स्प्रेड आपके लॉस को लिमिट कर देता है, जिससे आप ट्रेड में बने रहते हैं। एक या दो दिन के बाद आईवी फिर से सामान्य हो जाता है।



