Old vs New Tax Regime:अगर आपकी सालाना सैलरी 15 लाख रुपये है, तो टैक्स बचाने का अच्छा मौका है। वित्त वर्ष 2025-26 से न्यू टैक्स रिजीम में बड़ा बदलाव आया है। अब 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा। ऐसे में 15 लाख रुपये कमाने वाले लोगों को न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम में से किसमें कितना टैक्स देना पड़ेगा? आइए विस्तार से समझते हैं।
15 लाख सैलरी पर टैक्स
सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को अब डिफॉल्ट विकल्प बना दिया है। आम सैलरीड क्लास में से 88% टैक्सपेयर पहले ही इसमें शिफ्ट हो चुके हैं।15 लाख रुपये सालाना सैलरी वाले व्यक्ति की गणना कि बाक करें तो ग्रॉस सैलरी ₹15,00,000 है। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 घटाने के बाद टैक्सेबल इनकम ₹14,25,000 रह जाती है। स्लैब के अनुसार बेसिक टैक्स ₹93,750 बनता है। इसमें 4% स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेस जोड़ने पर कुल टैक्स ₹97,500 होता है।खास बात ये है कि अगर आपकी सैलरी 12.75 लाख रुपये तक है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद ₹12 लाख टैक्सेबल इनकम पर ₹60,000 की रिबेट मिलने से टैक्स पूरी तरह शून्य हो जाता है।
ओल्ड टैक्स रिजीम
ओल्ड टैक्स रिजीम में डिडक्शन का ज्यादा मिलता है, लेकिन इसके लिए कई निवेश करने पड़ते हैं। ग्रॉस सैलरी ₹15,00,000 से स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 घटाने के बाद टैक्सेबल इनकम ₹14,50,000 रह जाती है। अगर आप 80C में ₹1.5 लाख, NPS में ₹50,000 होम लोन ब्याज पर ₹2 लाख और हेल्थ इंश्योरेंस में ₹25,000 तक का डिडक्शन लेते है, तो टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है। इन डिडक्शन्स के बाद कुल टैक्स लगभग ₹1,17,000 बनता है।
न्यू vs ओल्ड टैक्स रिजीम कौन सा बेहतर?
5 लाख रुपये सालाना सैलरी पर न्यु टैक्स रिजीम में टैक्स ₹97,500 लगता है, जबकि ओल्ड टैक्स रिजीम में यह ₹1,17,000 के आसपास है। इस हिसाब से न्यू टैक्स रिजीम 15 लाख सैलरी वालों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है। हालांकि, अगर आपके पास होम लोन, PPF,LIC,NPS या हेल्थ इंश्योरेंस जैसे बड़े निवेश हैं, तो ओल्ड रिजीम अभी भी बेहतर विकल्प हो सकता है।



