Niveshak (Investors) : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्व का तनाव घटने से भारतीय शेयर बाजारों में रौनक लौट आई है। निवेशकों के मन में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह निवेश करने का सही समय है? एक्सपर्ट्स के अनुसार निवेशकों को भले ही बाजार में रिकवरी दिख रही है, लेकिन निवेश में सावधानी बरतना अब भी जरूरी है।
एकमुश्त निवेश या धीरे-धीरे पैसे लगाएं?
जानकारों के अनुसार अगर आपका नजरिया 3 से 5 साल का है, तो यह एक बेहतरीन एंट्री लेवल है। बाजार में प्राइस, टाइम और करेंसी तीनों स्तरों पर करेक्शन हो चुका है। जब सेंटीमेंट सबसे ज्यादा नकारात्मक होता है, तभी पैसा बनाने का सबसे अच्छा मौका होता है। उन्होंने कहा कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय अगले 1-2 महीनों में पैसा धीरे-धीरे लगाएं। जो निवेशक खुद फैसला नहीं ले पा रहे, वे फ्लेक्सी कैप या मल्टीकैप फंड चुन सकते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो उनके अनुसार, निवेशक अपना पैसा लिक्विड या आर्बिट्राज फंड में डालें और अगले 45 दिनों के लिए डेली एसटीपी लगा दें। इससे बाजार की अस्थिरता का फायदा मिलेगा और एवरेजिंग बेहतर होगी। आक्रामक निवेशकों के लिए 2-4 हफ्ते और कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए 2-4 महीने का स्टैगरिंग पीरियड सही रहेगा। इसका मतलब है कि निवेशकों को एक बार में पूरा पैसा निवेश करने की जगह थोड़ा-थोड़ा निवेश करना ठीक रहेगा।
किन सेक्टर्स में है कमाई का मौका?
बाजार के जानकारों के अनुसार अग्रेसिव निवेशकों के लिए तीन सेक्टर फंड्स का सुझाव दिया है 50 प्रतिशत बैंकिंग, 25 प्रतिशत कंजम्पशन और 25 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर फंड। माना जा रहा है कि ऑटो सेक्टर में शॉर्ट टर्म में कुछ दबाव दिख सकता है, लेकिन कैपिटल गुड्स में लॉन्ग टर्म स्टोरी और सरकार का फोकस (विशेषकर पावर सेक्टर पर) काफी मजबूत है। मॉडरेट रिस्क लेने वालों के लिए मल्टी एसेट एलोकेशन फंड बेहतर हैं, क्योंकि वहां गोल्ड और सिल्वर का भी एक्सपोजर मिलता है।
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अभी सावधानी बरतने की सलाह
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भले ही युद्ध रुक गया हो, लेकिन इसका असर आने वाले नतीजों और कंपनियों के गाइडेंस पर दिखेगा। डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों का असर मार्जिन पर पड़ेगा। आने वाले समय में महंगाई 4 प्रतिशत तक जा सकती है, जिस पर नजर रखना जरूरी है। बाजार का ध्यान अब सिर्फ तिमाही नतीजों पर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले गाइडेंस पर होगा।
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