Gold Price : चीन के कई बड़े बैंकों ने अब आम निवेशकों के लिए सोने और दूसरे प्रीशियस मेटल्स की ट्रेडिंग से जुड़ी सेवाएं बंद करना शुरू कर दिया है। इसकी सबसे बडी वजह सोने के दामों में भारी गिरावट बताई जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ महीने पहले तक सोना लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा था. निवेशकों को लग रहा था कि इसकी कीमतें अब और बढ़ेंगी. लेकिन बाजार ने ऐसी पलटी मारी कि कुछ ही महीनों में सोना करीब 56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया. इस गिरावट ने सिर्फ निवेशकों को ही नहीं, बल्कि चीन के सबसे बड़े बैंकों को भी डरा दिया.
1.97 लाख रुपये से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस साल जनवरी में स्पॉट गोल्ड करीब 5,600 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। अगर इसे भारतीय कीमतों में समझें तो यह करीब 5.32 लाख रुपये प्रति औंस या लगभग 1.97 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बैठता है। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. इस हफ्ते स्पॉट गोल्ड 4,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से भी नीचे फिसल गया. यानी करीब 3.80 लाख रुपये प्रति औंस या लगभग 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम। यानी कुछ ही महीनों में सोने की कीमत करीब 56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम या लगभग 29 फीसदी तक गिर गई। अगर भारत में मौजूदा सोने के भाव की बात करें तो यह करीब 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है. यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार का मौजूदा स्तर भारत के भाव के बेहद करीब पहुंच चुका है.
बैंक ने कहा अपनी सभी खुली पोजीशन बेच दें या बंद कर दें.
चीन के सबसे बड़े बैंक इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (आईसीबीसी) ने ऐलान किया है कि वह 24 जुलाई को सेटलमेंट के बाद शंघाई गोल्ड एक्सचेंज से जुड़े प्रीशियस मेटल्स ट्रेडिंग प्रोडक्ट्स के लिए व्यक्तिगत निवेशकों को दी जाने वाली इंटरमीडियरी सर्विस बंद कर देगा। आसान भाषा में कहें तो अब आम निवेशक बैंक के जरिए इन गोल्ड और सिल्वर प्रोडक्ट्स में ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। बैंक ने अपने ग्राहकों से साफ कहा है कि वे 24 जुलाई से पहले अपनी सभी खुली पोजीशन बेच दें या बंद कर दें.
एक और बैंक ने किया एलान
सिर्फ आईसीबीसी ही नहीं, चाइना गुआंगफा बैंक ने भी अपने ग्राहकों से कहा है कि वे गुरुवार दोपहर 3.30 बजे (हांगकांग समय) तक अपनी प्रीशियस मेटल्स की पोजीशन बंद कर दें। अगर ग्राहक ऐसा नहीं करते हैं, तो महीने के आखिर तक बैंक उनकी पोजीशन फोर्स्ड लिक्विडेशन यानी जबरन बंद कर देगा। हालांकि बैंक ने यह भी साफ किया है कि ग्राहक अब भी गोल्ड अक्यूम्युलेशन प्लान और गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) जैसे ऑप्शन में पैसा लगा सकते हैं. पूरी तरह निवेश पर रोक नहीं लगी है. सिर्फ ज्यादा रिस्क वाली ट्रेडिंग सेवाएं बंद की जा रही हैं।
आखिर बैंक इतने परेशान क्यों ?
इसकी सबसे बड़ी वजह है बाजार में बढ़ता रिस्क है। सोने की कीमतें पिछले दो साल में दोगुने से भी ज्यादा बढ़ी थीं. लेकिन अब वही तेजी उल्टी दिशा में जाती दिख रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ाया. इसके बाद निवेशकों को लगने लगा कि अमेरिका का सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ब्याज दरें बढ़ने की खबरें आ रही है. वो भी एक दो नहीं तीन बार, ब्याज दरें बढ़ने की खबर है. कई ब्रोकरेज हाउस ने ऐसा साल 2026 के अंत तक होने की आशंका जताईं है. इसी वजह से सेटीमेंट बदल गया।
यह फैसला सिर्फ रिस्क कम करने के लिए है
आईसीबीसी और चाइना गुआंगफा बैंक, दोनों ने साफ कहा है कि यह कदम रिस्क मैनेजमेंट यानी रिस्क कंट्रोल के तहत उठाया गया है। यह रोक स्पॉट ट्रेडिंग और डिफर्ड डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट्स, दोनों पर लागू होगी. बैंक अब ऐसे कारोबार से दूरी बना रहे हैं, जहां कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से ग्राहकों को बड़ा नुकसान हो सकता है.
यह पहला मौका नहीं है
इस साल की शुरुआत में पोस्टल सेविंग्स बैंक ऑफ चाइना और पिंग एन बैंक भी इसी तरह की घोषणाएं कर चुके हैं. चीन के बड़े बैंक धीरे-धीरे एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. पिछले एक साल से लगातार सख्ती बढ़ रही थी। अगर पिछले एक साल पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि चीन के बैंक लगातार रिटेल निवेशकों के लिए प्रीशियस मेटल्स में निवेश की शर्तें सख्त करते जा रहे थे। वे लगातार रिस्क को लेकर चेतावनी दे रहे थे. ऐसा इसलिए क्योंकि गोल्ड और सिल्वर में उतार-चढ़ाव इतना ज्यादा हो गया था कि बड़े-बड़े क्वांटिटेटिव हेज फंड्स तक को नुकसान उठाना पड़ा।
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