Commodity : : पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में लगातार सोना, चांदी और बेस मेटल्स जैसे कॉपर, जिंक, एल्यूमिनियम में तेज गिरावट देखने को मिल रही है. कई मेटल्स तो मल्टी-मंथ लो पर पहुंच गए हैं. दुनिया भर के कमोडिटी मार्किट में मेटल्स में भारी गिरावट को लेकर चिंता जताई जा रही है। अगर आसान भाषा में समझें तो पूरा कमोडिटी बाजार इस समय दबाव में है और इसका असर हर धातु पर दिख रहा है.
डॉलर ने बिगाड़ा पूरा खेल-
दरअसल जानकारों की मानें तो इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी डॉलर की मजबूती। डॉलर इंडेक्स फिर से 100 के ऊपर चला गया है और कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह 103-104 तक भी जा सकता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो कमोडिटी महंगी हो जाती हैं, क्योंकि दुनिया भर में उनका ट्रेड डॉलर में होता है. ऐसे में खरीदारी घटती है और कीमतें नीचे आती हैं. यही वजह है कि इस समय पूरा कमोडिटी बास्केट “रेड जोन” में चला गया है.
चीन की सुस्ती ने भी बढ़ाया दबाव
जानकारों के अनुसार दूसरी बड़ी वजह है चीन की कमजोर डिमांड।. चीन दुनिया का सबसे बड़ा मेटल कंज्यूमर है. वहां से अगर मांग कमजोर होती है तो ग्लोबल मार्केट पर सीधा असर पड़ता है।. इस समय चीन के इंडस्ट्रियल और ऑटो सेक्टर में स्लोडाउन देखा जा रहा है. इसी वजह से कॉपर और जिंक जैसे बेस मेटल्स पर भारी दबाव है। यूरोप और अमेरिका से भी ज्यादा मजबूत डिमांड नहीं आ रही, जिससे हालत और खराब हो गए हैं.
US Fed की सख्ती से निवेशक डरे
US Federal Reserve का “hawkish” रुख भी मार्केट पर भारी पड़ रहा है. ब्याज दरें ज्यादा होने की उम्मीद से निवेशक कमोडिटी से पैसा निकालकर बॉन्ड और डॉलर की तरफ जा रहे हैं. 10 साल और 30 साल के US ट्रेजरी यील्ड्स भी ऊंचे स्तर पर हैं. इसका मतलब साफ है कि पैसा कमोडिटी से निकलकर सुरक्षित निवेश की तरफ जा रहा है.
कॉपर में लगातार गिरावट
कॉपर, जिसे “डॉक्टर कॉपर” कहा जाता है क्योंकि यह आर्थिक सेहत बताता है, उसमें भी लगातार कमजोरी दिख रही है. कॉपर इस समय एक रेंज में फंसा हुआ है, लेकिन दबाव बढ़ता जा रहा है. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें अभी और गिरावट आ सकती है. ट्रेडिंग लेवल्स की बात करें तो कॉपर पर 1280 के आसपास सेलिंग प्रेशर देखा जा रहा है और नीचे 1250 और 1200 तक के लेवल्स भी संभव बताए जा रहे हैं.
चांदी सबसे ज्यादा टूटी
अगर किसी मेटल ने सबसे ज्यादा झटका दिया है तो वह है चांदी (Silver). चांदी अपने पीक से लगभग आधी रह गई है और अब 60 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रही है. यह एक बड़ा साइकोलॉजिकल लेवल माना जाता है.
चांदी पर दबाव इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह सिर्फ बुलियन नहीं बल्कि 50% इंडस्ट्रियल मेटल भी है. यानी इंडस्ट्री की कमजोरी का सीधा असर इस पर पड़ता है.
सोना भी दबाव में
सोना भी इस गिरावट से बच नहीं पाया है. हालांकि इसमें गिरावट उतनी तेज नहीं है, लेकिन यह अपने हाई लेवल से काफी नीचे आ चुका है. गोल्ड की डिमांड आमतौर पर सेफ-हेवन के तौर पर होती है, लेकिन इस समय डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों के दबाव ने इसे भी कमजोर कर दिया है.
टेक और AI सेल-ऑफ का असर
एक और दिलचस्प कारण सामने आया है टेक और AI स्टॉक्स में प्रॉफिट बुकिंग. जब टेक और AI शेयरों में गिरावट आती है तो निवेशक वहां से पैसा निकालकर कमोडिटी में भी रिस्क कम कर देते हैं. इसका असर मेटल्स पर भी देखने को मिला है.
क्रूड ऑयल भी दबाव में
सिर्फ मेटल्स ही नहीं, बल्कि क्रूड ऑयल भी इस समय दबाव में है. ब्रेंट क्रूड में गिरावट देखने को मिली है और यह करीब 70–73 डॉलर के दायरे में आ सकता है. कारण वही हैं डॉलर मजबूत, डिमांड कमजोर और सप्लाई स्थिर.
आगे क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों तक मेटल मार्केट में दबाव बना रह सकता है. जून-जुलाई का समय आमतौर पर स्लो डिमांड सीजन माना जाता है. ऐसे में डॉलर मजबूत रहेगा, चीन की डिमांड कमजोर रहेगी और US Fed की सख्ती जारी रहेगी तो मेटल्स पर दबाव बना रह सकता है. आसान भाषा में कहें तो अभी पूरा कमोडिटी बाजार एक “डबल प्रेशर” में है तो एक तरफ डॉलर की मजबूती और दूसरी तरफ ग्लोबल डिमांड की कमजोरी. इसी वजह से सोना, चांदी और कॉपर जैसे सभी मेटल्स में गिरावट दिख रही है. अगर हालात नहीं बदले, तो आने वाले समय में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
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