Oil crises: ईरान के साथ अमेरिका और इजराइल का युद्व जैसे जैसे बढता जा रहा है दुनिया भर में देशों में तेल का संकट खडा होता जा रहा है। तेल की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा संकट के बीच G-7 देशों के वित्त मंत्री सोमवार 9 मार्च को आज आपातकालीन तेल भंडार जारी करने के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। यह जानकारी एक फाइनेंस से जुडी मीडिया की एक रिपोर्ट में दी गई है।
आपात भंडार से तेल
रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के समन्वय में आपात भंडार से तेल बाजार में जारी किया जा सकता है, ताकि कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। अब तक G-7 के तीन देशों, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। G-7 दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपात भंडार से तेल जारी किया जाता है तो इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। निवेशकों में बढ़ती तेल कीमतों को लेकर चिंता के कारण ज्यादातर बाजारों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर पूर्वी एशिया की बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी उद्योग व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से वहां के बाजारों में घबराहट बढ़ गई है।
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जापान के टोक्यो शेयर बाजार का निक्केई सूचकांक करीब 7 प्रतिशत तक गिर गया। इतना बड़ा बाजार होने के कारण इसमें इतनी गिरावट आने के लिए बड़ी मात्रा में शेयरों की बिकवाली होती है।
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दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी लगभग 8 प्रतिशत गिर गया। वहां की सरकार बाजार को स्थिर करने के लिए तेल की कीमतों पर नियंत्रण लगाने जैसे कदमों पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि ऐसा कदम पिछले करीब 30 सालों में पहली बार उठाया जा सकता है। लगातार गिरावट के बीच निवेशक अमेरिका की उस बात से भी आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं जिसमें कहा गया है कि यह संकट थोड़े समय का है और तेल की कीमतें जल्द ही कम हो जाएंगी।



