US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता लगभग पूरा हो चुका है और इस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे. ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समझौते में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे. हालांकि समझौते को लेकर दोनों देशों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. जहां ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इसे सकारात्मक कदम बताया है,वहीं ईरान के कट्टरपंथी गुट और आम लोगों के बीच अब भी इस समझौते को लेकर संशय बना हुआ है.
डिजिटल हस्ताक्षर और 14 सूत्रीय मसौदा
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार,एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि ट्रंप, जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच 14 बिंदुओं वाला एक प्रारंभिक मसौदा तैयार हुआ है, जिस पर आगे तकनीकी स्तर पर चर्चा होनी बाकी है.
शांति समझौते को लेकर आश्वस्त नहीं ईरान के लोग
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में बड़ी संख्या में लोग इस शांति समझौते को लेकर आश्वस्त नहीं हैं. परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध, विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियां और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क जैसे मुद्दे अब भी विवाद की वजह बने हुए हैं. कट्टरपंथी गुटों का आरोप है कि सरकार ने अमेरिका के सामने जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं.
इजराइल से भी आई तीखी प्रतिक्रिया
इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने कहा है कि यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है तो ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने मौजूदा नेतन्याहू सरकार को ईरान नीति में असफल बताया और कहा कि भविष्य में ईरान में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
आर्थिक राहत पर विरोधाभासी बयान
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यदि इसकी सभी शर्तें लागू होती हैं तो यह ईरान के लिए गर्व का दस्तावेज साबित होगा. वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अभी तक ईरान को किसी प्रकार की आर्थिक राहत नहीं दी गई है. दूसरी ओर ट्रंप ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका समझौते के तहत ईरान को 30 करोड़ डॉलर की सहायता देगा. हालांकि उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में शर्तें पूरी होने पर प्रतिबंधों में राहत संभव है.
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