Iran-America War : ईरान और अमेरिका के बीच होमुर्ज स्ट्रेट में युद्व तेज हो गया है। दोनों ओर से सैन्य ठिकानों पर हमले जारी हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने बहरीन के अल-जुफैर सैन्य अड्डे और अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। साथ ही जॉर्डन के एक एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों और अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। उधर, जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने भी ईरान पर बड़े पैमाने पर जवाबी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, करीब पांच घंटे तक चले हमलों में बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनार्क, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
भारत ने ईरान के उप राजदूत को तलब किया
ईरान ने यूएई के दो तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया है। यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट में मोंबासा और अल बहिया नाम के इन टैंकरों पर हमले में एक भारतीय की मौत हो गई, जबकि 6 भारतीयों समेत 8 लोग घायल हैं। भारत सरकार ने ईरानी हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के मामले में ईरान के उप राजदूत को तलब किया है।
होर्मुज पर शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए
उधर संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने कहा है कि होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक यहां से सभी देशों के जहाजों को बिना किसी शुल्क के गुजरने का अधिकार है।
समुद्री कानून में टोल अवैध
संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून यूएनक्लोज के तहत होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट में सभी देशों के जहाजों को ट्रांजिट पैसेज यानी बिना रोक-टोक आने-जाने का अधिकार है। इस अधिकार पर कोई देश अपनी तरफ से शुल्क या नई शर्तें नहीं लगा सकता।
अमेरिका अपना ही तर्क कमजोर कर रहा
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के विदेश नीति विशेषज्ञ रॉबर्ट केगन का कहना है कि अगर अमेरिका खुद टोल वसूलेगा, तो वह उसी सिद्धांत को कमजोर करेगा जिसके आधार पर वह अब तक ईरान का विरोध करता रहा है। इससे अमेरिका का फ्रीडम ऑफ नेविगेशन यानी समुद्री मार्गों पर सभी देशों की स्वतंत्र आवाजाही वाला तर्क कमजोर पड़ जाएगा।
ट्रम्प का फैसला अमेरिका के पुराने रुख से उलट
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्काे रुबियो ने 23 जून को कहा था कि ष्किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।ष् ऐसे में ट्रम्प का नया ऐलान उनकी अपनी सरकार के पहले के आधिकारिक रुख से अलग माना जा रहा है।
अमेरिका होर्मुज पर दोबारा नाकेबंदी क्यों लगा रहा है?
ईरान के हमलों और धमकी के जवाब में- अमेरिका का कहना है कि ईरान ने हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कई जहाजों को निशाना बनाया। साथ ही ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग को बंद करने की भी घोषणा की थी। अमेरिका का दावा है कि इसी के जवाब में उसने दोबारा नाकाबंदी लागू की।
समुद्री मार्ग खुला रखने के लिए- राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है और यह खुला रहना चाहिए। उनके मुताबिक, अमेरिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बाधित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े व्यापार को रोकने के लिए है।
ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर करने के लिए- अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस अभियान का मकसद ईरान की हमले करने की क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज में नागरिक तथा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा की लागत वसूलने की योजना- ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर भारी खर्च कर रहा है। इसलिए अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा के बदले शुल्क (कार्गाे चार्ज) लेने की योजना बनाई गई है, ताकि सुरक्षा पर होने वाला खर्च पूरा किया जा सके।
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