Tamil Nadu Assembly Elections 2026: तमिलनाडु की सियासत चुनावी उबाल पर है. जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में आज (20 अप्रैल) कन्याकुमारी में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने बीजेपी और RSS पर जमकर हमला बोला. वहीं एआईएडीएमके पर सीधे बीजेपी के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाया. जिससे तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल मच गई है. उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके के नेताओं ने भ्रष्टाचार की वजह से बीजेपी के सामने समर्पण कर दिया. बीजेपी प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एआईएडीएमके का इस्तेमाल कर रही है.
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि RSS द्रविड़ विचारधारा को पसंद नहीं करता और तमिलनाडू पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहता है. तमिलनाडु की पहचान, संस्कृति, भाषा को बचाने के लिए इस विचारधारा को समझना जरूरी है.
“भारत संघ के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर है”
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि मैंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की. इस यात्रा का मकसद देश को एकजुट करना था, इसीलिए इसे ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कहा गया. इसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि भारत अलग-अलग विचारों, भाषाओं, परंपराओं, इतिहासों और धर्मों से मिलकर बना है और इन सभी को आपसी तालमेल, प्रेम और स्नेह के साथ एक-दूसरे के साथ खड़ा होना चाहिए. इसीलिए यह यात्रा महत्वपूर्ण थी. इस देश में अलग-अलग धर्म, भाषाएं, इतिहास, परंपराएं और संस्कृतियां हैं. लेकिन हमें इन सभी लोगों को एकजुट करना है और उन्हें एक होकर रहने के लिए प्रेरित करना है. उन्होंने कहा कि हर एक भाषा अपने लोगों का इतिहास होती है. हर भाषा भारत संघ के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर है. तमिल लोगों का अपना हज़ारों साल पुराना इतिहास है और उनकी अपनी भाषा है. इसी तरह, पंजाब, उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों, कर्नाटक और महाराष्ट्र के लोगों की भी अपनी भाषाएं, इतिहास और परंपराएं हैं.
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“पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री ने बहुत खतरनाक काम किया”
लोकसभा में विपक्ष के नेता (Rahul Gandhi) ने कहा कि कुछ दिन पहले पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री ने बहुत खतरनाक काम किया. उन्होंने देश से कहा कि वे महिलाओं के लिए बिल पास करना चाहते हैं, लेकिन असली प्लान भारत के चुनावी ढांचे को बदलना था. महिलाओं के बिल के पीछे एक डिलिमिटेशन बिल छिपा था जो भारत के चुनाव क्षेत्रों को बदल देगा. वे दक्षिणी राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और छोटे राज्यों की सीटों की संख्या कम करना चाहते थे और भारत में सत्ता के संतुलन को पूरी तरह से बदलना चाहते थे.’



