Women Reservation Bill Controversy: कांग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने संविधान (131वां संशोधन) बिल लोकसभा में पास नहीं होने पर कहा कि तीन दिन के विशेष सत्र में लोकतंत्र की जीत हुई है, संविधान की जीत हुई है. विपक्ष एकता की जीत हुई है हार बुलडोजर की राजनीति की हुई है. छल कपट परिसीमन की हार हुई है धोखेबाजी की हार हुई है. तानाशाही की राजनीति(मैं कहता हूं वहीं करो, मेरा विरोध करते हो तो आप गलत हो) इस तरह की राजनीति की हार हुई हुई है. उनका मुद्दा परिसीमन का था महिला आरक्षण का नहीं था नारी शक्ति वंदन अधिनियम 22 सितंबर 2023 को सर्वसम्मति से पारित हुआ. लेकिन लागू नहीं हुआ. 30 महीने लगे, अचानक 16 अप्रैल की रात को 9:30 बजे ये अधिनियम नोटिफाई होता है.
“वो लागू कर रहे हो क्या मंशा थी”
उन्होंने (Jairam Ramesh) आगे कहा कि मेरा सवाल है कि क्यों आप 16 अप्रैल 2026 के रात को जो 3 साल पहले अधिनियम पारित किया गया था वो लागू कर रहे हो क्या मंशा थी? आपकी नीयत क्या थी? बार-बार विपक्षी पार्टियों ने 29 अप्रैल के बाद जब बंगाल के चुनाव खत्म होते हैं तब सर्वदलीय बैठक बुलाए और आपके क्या प्रस्ताव है वो बताए. विस्तार से चर्चा हो उसके बाद सदन बुलाए और संविधान संशोधन कराए, विधेयक पारित कराना है वो करिए. हम आपके साथ हैं लेकिन एक सर्वदलीय बैठक तो बुलाए, चुनाव के वक्त नहीं, चुनाव के अभियान के बाद, यानि 10 दिन बाद नहीं माने, नजरअंदाज किया गया. अभी जल्दबाजी क्यों? चुनाव का प्रचार क्यों?
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“यह एक बड़ी साज़िश थी विपक्ष ने इसे नाकाम किया”
वहीं देश के नाम प्रधानमंत्री के संबोधन पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी (Rashid Alvi) ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं लगा कि प्रधानमंत्री भारत के लोगों को संबोधित कर रहे थे. ऐसा लगा जैसे भाजपा का एक नेता दूरदर्शन का गलत इस्तेमाल कर रहा हो. चुनाव के दौरान दूरदर्शन का इस्तेमाल करना न सिर्फ गलत इस्तेमाल है, बल्कि आचार संहिता का भी उल्लंघन है. अपने भाषण में, उन्होंने विपक्ष के खिलाफ कई गलत बयान दिए. महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हुआ था, फिर भी सरकार ने जानबूझकर इसे परिसीमन से जोड़कर लागू करने में देरी की. मौजूदा 543 सीटों में से एक तिहाई महिलाओं के लिए क्यों नहीं आरक्षित की गईं? इसके बजाय, संसद को 850 सीटों तक बढ़ाने की साज़िश रची गई, जिसमें ज़्यादातर हिंदी बेल्ट में थीं, जिससे भाजपा हमेशा सत्ता में रहे. यह एक बड़ी साज़िश थी और विपक्ष ने इसे नाकाम किया.



