US Iran Conflict News: ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई वार्ता विफल होने की बड़ी वजह सामने आई है. दरअसल, ईरान ने 5 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन अमेरिका 20 साल की शर्त पर अड़ा रहा. जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच समझौता नहीं हुआ. वहीं अमेरिका की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी बंदरगाहों की सैन्य नाकाबंदी शुरू कर दी गई है. अमेरिकी सेना की तरफ से साफ तौर पर कहा गया है कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा, जबकि अन्य देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी.
नाकाबंदी लागू होने पर ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
वहीं ईरान ने नाकाबंदी लागू होने के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने युद्ध करने की चेतावनी दी है. सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने कहा कि ओमान सागर और फारस की खाड़ी का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा. अमेरिका की नाकाबंदी को अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला. कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका की इस नाकाबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया है. बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का अहम समुद्री मार्ग है. यहां से करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब तेल बाजार में भी दिखने लगा है. युद्ध के बाद तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत तक का उछाल आया है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा और बाद में करीब 99 डॉलर पर आ गया.
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अमेरिकी नाकाबंदी के बीच चीनी टैंकर ने होर्मुज किया पार
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका की नाकाबंदी के बीच रिच स्टार्री नाम के एक चीनी टैंकर फारस की खाड़ी से बाहर निकल गया है. शिपिंग डेटा की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की नाकाबंदी लागू करने के बाद ऐसा करने वाला पहला जहाज है. इस जहाज में करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लदा है.
इजरायल ने लेबनान के सरकारी अस्पताल में गिराए बम
इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के तेबनिन अस्पताल पर बमबारी की है. जिससे अस्पताल को भारी नुकसान पहुंचा है. कई कमरों में उपकरण उलटे पड़े नजर आए है. अस्पताल के बाहर खड़ी गाड़ियों को भी मलबा गिरने से नुकसान पहुंचा है. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल के हमलों से लेबनान में अब तक करीब 2 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इनमें ज्यादातर हमले दक्षिणी इलाकों में हुए हैं.



