US Iran War: ईरान के सैन्य ठिकानों को अमेरिकी सेना ने एक बार फिर निशाना बनाया है. मंगलवार को लगातार चौथा दिन था जब अमेरिका ने हमला किया. साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर भी समुद्री नाकेबंदी शुरू कर दी गई है. अमेरिका का कहना है कि ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है. यहीं नहीं फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले दिन भी हमला करने की बात कही. उन्होंने अगले हफ्ते ईरान के बिजलीघर और पुल हमारे निशाने पर होंगे. अगर समझौता नहीं हुआ ईरान में कुछ नहीं बचेगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका पर तब तक हमले होते रहेंगे जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता. अगर जरूरत पड़ी तो जमीनी सैन्य अभियान भी चलाया जा सकता है. इसके लिए सहयोगी देशों की मदद ली जा सकती है.
कतर के अमेरिकी बेस पर दिखाई दिए हमले के निशान
अल-उदीद एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरों में कतर में अमेरिकी सेना के वेयरहाउस को नुकसान होने के संकेत मिले है. ईरानी मीडिया की तरफ से वीडियो जारी किया गया है जिसमें मिसाइल हमले के बाद के नुकसान को दिखाया गया है. कतर के अल-उदीद में अमेरिका का बड़े बड़ा सैन्य अड्डा बताया जा रहा है. ईरान ने कतर समेत खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया है. हालांकि अमेरिका की तरफ से वेयरहाउस नुकसान की अधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है.
ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद दोबारा क्यों भिड़े?
1.ईरान की मांग है कि पहले अमेरिका प्रतिबंध हटाए. लेकिन अमेरिका का कहना है कि प्रतिबंध तभी हटेंगे, जब ईरान परमाणु कार्यक्रम पर तय शर्त पूरी करेगा.
2.अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाए. लेकिन ईरान इसे अपना वैध अधिकार बता रहा है और अमेरिका की बात मानने से इनकार कर रहा है.
3.दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होती है. अमेरिका चाहता है कि जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक जारी रहे, लेकिन इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता का मामला मान रहा है.
4. अमेरिका ईरान के बढ़ते क्षत्रीय प्रभाव और उसके समर्थित सशस्त्र सूमहों पर रोक लगाना चाहता है कि लेकिन ईरान इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है.
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