Sprain : कई बार लोग पैर में आई मोच को मामूली चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना ठीक नहीं है। यह लिगामेंट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। अगर समय पर फर्स्ट एड न मिले तो दर्द और सूजन बढ़ सकती है और ठीक होने में लंबा समय लग सकता है।
मोच (Sprain) क्या होती है?
चिकित्सक के अनुसार मोच का मतलब- ‘लिगामेंट्स में चोट लगना’ है। आसान शब्दों में इसे ऐसे समझिए कि लिगामेंट शरीर में हड्डियों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। ये लिगामेंट शरीर के जॉइंट्स को सपोर्ट करते और स्थिरता प्रदान करते हैं। एक शरीर में 900 से ज्यादा लिगामेंट्स होते हैं। मोच उस चोट को कहते हैं, जिसमें लिगामेंट या तो खिंच जाते हैं या डैमेज हो जाते हैं। आमतौर पर पैर अचानक मुड़ने, फिसलने या गिरने पर लिगामेंट डैमेज होते हैं। लिगामेंट डैमेज होने पर दर्द, सूजन और जोड़ को हिलाने में परेशानी हो सकती है। टखने की मोच सबसे कॉमन मोच मानी जाती है।
मोच और फ्रैक्चर में क्या फर्क है?
चिकित्सक बताते हैं कि मोच (Sprain) आने पर लिगामेंट डैमेज होते हैं, जबकि फ्रैक्चर में हड्डी टूटती है। दोनों में दर्द और सूजन हो सकती है, लेकिन फ्रैक्चर ज्यादा गंभीर होता है।
पैर में मोच सबसे ज्यादा किस हिस्से में आती है?
सबसे ज्यादा टखने (एंकल) में मोच आती है। यह आमतौर पर चलते-दौड़ते, सीढ़ियां उतरते या खेलते समय पैर अचानक मुड़ने से होता है। टखने के बाहरी हिस्से के लिगामेंट्स सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसलिए एंकल स्प्रेन सबसे कॉमन मोच मानी जाती है।
मोच आने के तुरंत बाद क्या करें?
चिकित्सक बतातें हैं कि पैर में मोच आने के तुरंत बाद आराम दें, जिस हिस्से में मोच आई है, उस पर वजन डालने या उसे ज्यादा हिलाने-डुलाने से बचें। 15-20 मिनट तक बर्फ की सिकाई करें। इस प्रोसेस को हर 2-3 घंटे में दोहराएं। बर्फ को सीधे स्किन पर न लगाएं। इलास्टिक बैंडेज को हल्का दबाव देकर बांधें। इससे सूजन कम करने में मदद मिलती है। मोच वाले अंग को हार्ट लेवल से ऊपर रखें, ताकि सूजन कम हो। दर्द को नजरअंदाज करके चलना-फिरना जारी न रखें। पहले 48 घंटे गर्म सिकाई न करें इससे गर्म पानी, हीट पैड या मालिश से शुरुआती सूजन बढ़ सकती है।
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