Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इशारों ही इशारों में केन्द्र सरकार को सलाह दी है कि वह छात्र आंदोलन में शक्ति नहीं दिखाकर उनसे संवाद करें। दरअसल देशभर में छात्र संगठन एकजुट होते जा रहे हैं और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं इससे उपजने वाले संभावित भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल को समझते हुए आर एसएस प्रमुख ने अपना बयान दिया है। शनिवार को दिल्ली में मोहन भागवत ने कहा, आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए।
पहले के समय में और आज में अंतर
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि छात्रों को हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है। हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता। मोहन भागवत ने कहा, ‘पहले के समय में माता-पिता की बात बिना किसी सवाल के मान ली जाती थी। जब हम छोटे थे, तो माता-पिता जो कहते थे, वही अंतिम होता था।’ कोई बहस नहीं होती थी। श्रद्धा थी और प्रतिक्रिया भी नहीं होती थी, लेकिन अब समय बदल गया है। नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उन्हें हर बात का तर्क बताना पड़ता है।
छात्रों को अपना बनाने की सलाह
आरएसएस प्रमुख ने दरअसल अपने बयानों में केन्द्र को यह भी संकेत दिया है कि वह छात्रों के खिलाफ जाने के बजाए उन्हे अपना बनाए। भागवत ने कहा नई पीढ़ी को बहुत अपनापन देने की जरूरत है, उन्हें समय देने की जरूरत है और सबसे ज्यादा संवाद की जरूरत है। आज डिक्टेशन नहीं, डिस्कशन की जरूरत है। ऑर्डर नहीं, कॉन्शसनेस (जागरूकता) की जरूरत है। आज परिवारों में आपसी बातचीत पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। बच्चों और युवाओं के साथ नियमित संवाद ही उन्हें सही दिशा दे सकता है। केवल आदेश देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि परिवार और समाज को युवाओं के साथ समय बिताना होगा और उनकी बात भी सुननी होगी।
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