Bazaar : भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते गिरावट देखने को मिली, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में बंद हुए। इसकी मुख्य वजह वैश्विक अनिश्चितताएं, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, और आईटी सेक्टर की कमजोर कमाई का असर रही। हफ्ते की शुरुआत में बाजार ने थोड़ी मजबूती दिखाई, लेकिन बाद में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे बाजार पूरे हफ्ते दबाव में रहा। निफ्टी 50 पॉइंट गिरकर 23,897.95 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 2.33 प्रतिशत गिरकर 76,664.21 के स्तर पर आ गया। निवेशकों के बीच फिलहाल सतर्कता का माहौल है और वे नए संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
क्या कहते हैं जानकार
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। बाजार की दिशा काफी हद तक खबरों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक बाजारों के संकेत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अगर तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आती है तो बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।
US फेड मीटिंग पर टिकी नजर
अमेरिका की फेडरल रिजर्व की बैठक 28 से 29 अप्रैल को होने वाली है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। फिलहाल ब्याज दर 3.5 से 3.75 प्रतिशत के बीच है। अगर फेड की तरफ से कोई सख्त संकेत मिलता है तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
क्यू4 रिजल्ट बनेंगे बड़ा ट्रिगर
मार्च 2026 तिमाही के नतीजों का सीजन तेजी पकड़ रहा है और अगले हफ्ते 200 से ज्यादा कंपनियां अपने नतीजे घोषित करेंगी। इसमें बड़े नाम जैसे Maruti Suzuki India Ltd, ज़ोमैटो, UltraTech Cement Ltd, वेदांता, अडानी एंटरप्राइजेज और Hindustan Unilever Ltd शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अमेरिका -ईरान तनाव
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान मुद्दे पर बातचीत के लिए अधिकारियों की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी। इस घटनाक्रम ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है। अगर स्थिति और बिगड़ती है तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों और भारतीय बाजार पर पड़ेगा।
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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में पिछले हफ्ते काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। ब्रेंट क्रूड लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकिmarket ऊंचे स्तर पर बना रहा। हफ्ते के दौरान ब्रेंट में करीब 16% और लगभग 13% की तेजी दर्ज की गई। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय हैं और इससे महंगाई तथा बाजार दोनों पर दबाव पड़ सकता है।
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बिकवाली से दबाव
विदेशी निवेशकों ने बाजार में बड़ी बिकवाली की है, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है। शुक्रवार 24 अप्रैल को करीब 8,828 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जो इस महीने की बड़ी बिकवाली में से एक है। वहीं, घरेलू निवेशकों ने खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया। इस साल अब तक ने करीब 2.25 लाख करोड़ रुपए की निकासी की है, जबकि ने 2.79 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है।



