Women Reservation Bill Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के नाम संबोधन पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि 50% सीटें बढ़ जाती. मैं चुनौती देता हूं कि अपने विधेयक में वो लाइन दिखाएं जिसमें लिखा है कि हर विधानसभा की 50% सीटें बढ़ जाएंगी. सभी दलों ने आपको लिखकर अनुरोध किया था कि तमिलनाडु और बंगाल में चुनाव चल रहा है ये बैठक 10 दिन बाद बुलाएं. लोकसभा और राज्यसभा का सत्र आपने क्यों बुलाया? सिर्फ चुनावी स्टंट के लिए, हम 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन दे चुके हैं.
“चुनाव आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए”
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि राष्ट्र के नाम संदेश का कभी भी राजनीति या चुनाव प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं होता. चुनाव आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए. उन्हीं राजनीतिक दलों को टारगेट किया जा रहा है, जहां चुनाव है. ये एक चुनावी भाषण था.
“विदेश नीति क्यों ढह गई”
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि देश का हर राजनीतिक दल महिला आरक्षण पर एकमत है. देश इस वक्त जवाब मांग रहा है कि विदेश नीति क्यों ढह गई? महंगाई क्यों है? बेरोजगारी क्यों है? लोगों का ध्यान भटकाने के लिए 2023 में पारित हो चुके महिला आरक्षण बिल को वापस लेकर आए हैं.
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“राहुल गांधी को तो ऐसा कोई मंच नहीं मिलेगा”
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री को अच्छे से मालूम था कि 2023 में जब नारी वंदन संशोधन बिल पास हुआ था तो उस समय 500 संसद सदस्यों ने हिस्सा लिया था और 498 सांसदों ने इसका समर्थन किया था. इस बार वे जो नया परिसीमन वाला बिल लाए, उसमें 498 से घटकर 298 सदस्यों का समर्थन मिला तो 200 संसद के सदस्य विरोध में चले गए. ऐसा किसके कारण हुआ? यह संशोधन के कारण हुआ. महिला आरक्षण से किसी को विरोध नहीं था. उस समय भी सभी पार्टियों ने इसे तुरंत लागू करने की बात कही थी लेकिन फिर इसमें परिसीमन के साथ जोड़ा गया. यदि उनके मन में कोई राजनीति नहीं थी तो परसो रात को 10 बजे क्यों इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हुए? इससे पहले क्यों नहीं? इतनी जल्दी क्या थी? आप इसे चुनाव के बाद भी ला सकते थे. उनका राष्ट्र के नाम संबोधन प्रचार जैसी बात थी. राहुल गांधी को तो ऐसा कोई मंच नहीं मिलेगा. ऐसी स्थिति में राष्ट्र के नाम संबोधन का अर्थ क्या है?
“पद की गरिमा का ख्याल नहीं रखा गया”
राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन में पद की गरिमा का ख्याल नहीं रखा गया. दो राज्यों में चुनाव हो रहे हैं. उन्होंने जिस तरह का संदेश दिया वो महिला आरक्षण पर कम और राजनीतिक पार्टियों को कोसना, नीचा दिखाना ज्यादा था. ये पद की गरिमा के अनुरूप बिल्कुल नहीं था.



