Business News : 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026-27 में Central Government का सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, Central Government 12 से 13 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स रख सकती है, जो पिछले साल से 10दृ15ः ज्यादा हो सकता है। सड़कें, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, डिफेंस, शहरी विकास, हाउसिंग, पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी- इन सभी सेक्टर्स में खर्च बढ़ने की संभावना है। सरकार का मकसद साफ है- नौकरियां पैदा करना, निवेश खींचना और लंबी अवधि की ग्रोथ सुनिश्चित करना।
सेक्टोरल तस्वीर- किसे फायदा, किसे इंतजार
रिपोर्ट के मुताबिक, बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, सीमेंट, पावर, डिफेंस, हेल्थकेयर, फार्मा, टेलीकॉम, म्ट, रिन्यूएबल एनर्जी और मेटल्स सेक्टर को फायदा मिल सकता है। वहीं, कुछ सेक्टर्स में नीतिगत समर्थन पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
खपत की चिंता- शहर सुस्त, गांव अब भी डगमग
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। रिपोर्ट बताती है कि शहरी खपत में सुस्ती बनी हुई है और ग्रामीण मांग अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती है- कैपेक्स और कंजम्पशन के बीच सही संतुलन बनाना। बजट में ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती, रोजगार योजनाओं, स्किलिंग प्रोग्राम और टार्गेटेड वेलफेयर स्कीम्स के जरिए मांग को सहारा देने की कोशिश की जा सकती है।
डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशनरू पुरानी चुनौती, नई उम्मीद
सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती है- नॉन-टैक्स रेवेन्यू जुटाना। रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन से जुटाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। हालांकि बीते सालों में इस मोर्चे पर लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए हैं। ऐसे में बाजार सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप की उम्मीद कर रहा है।
टैक्स में राहत नहीं, लेकिन सिस्टम हो सकता है आसान
बड़े टैक्स कट की उम्मीद फिलहाल कम है। रिपोर्ट कहती है कि सरकार टैक्स दरें घटाने की बजाय टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, मुकदमेबाजी कम करने और रिफंड तेजी से देने पर फोकस कर सकती है। मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन को टार्गेटेड टैक्स इंसेंटिव मिल सकते हैं
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Central Government के लिए बड़ा सहारा
बजट के गणित में से मिलने वाला डिविडेंड अहम भूमिका निभा सकता है। थ्ल्26 में रिकॉर्ड सरप्लस मिलने के बाद थ्ल्27 में भी सरकार को त्ठप् से मजबूत डिविडेंड मिलने की उम्मीद है। इससे सरकार को उधारी कम करने और ग्रोथ खर्च बनाए रखने में मदद मिल सकती है
स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स- असली कहानी आंकड़ों से आगे
रिपोर्ट साफ कहती है कि बाजार सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सुधारों के संकेत भी देखेगा। म्ंेम व िक्वपदह ठनेपदमेे, लेबर रिफॉर्म्स, लॉजिस्टिक्स सुधार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कानूनी और रेगुलेटरी सरलीकरण। ये वो फैक्टर हैं जो लंबे समय में भारत को ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए और आकर्षक बना सकते हैं
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