Iran war effects : ईरान जंग का असर अब पूरी दुनिया में दिखने लगा है। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और विकासशील देशों को हो रही है। इन देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं और आम लोगों की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है। दरअसल, खाड़ी इलाके में लड़ाई की वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रास्ते बंद होने से तेल की कमी हो गई है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ा है जो बाहर से तेल मंगाते हैं। भारत भी अपनी उर्जा का 80 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। देश में तेल और गैस की किल्लत के बावजूद अभी भारत में हालात नियंत्रण में हैं।
पाकिस्तान की हालत खराब
पाकिस्तान की हालत काफी खराब होती जा रही है। देश अपनी लगभग 80ः ऊर्जा बाहर से मंगाता है। अब वहां पेट्रोल और डीजल की कमी होने लगी है। हालात संभालने के लिए सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं, जैसे स्कूल बंद कर दिए गए हैं, सरकारी दफ्तरों में 4 दिन का काम तय किया गया है और कई कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया है। सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं ताकि लोगों को राहत मिल सके, लेकिन आगे चलकर कीमतें बढ़ सकती हैं।
कई देशों में हालात ठीक नहीं
बांग्लादेश में भी हालात ठीक नहीं हैं। वहां 95% तेल आयात होता है और कई जगह पेट्रोल पंप खाली हो चुके हैं। वहीं श्रीलंका ने पेट्रोल बचाने के लिए हर बुधवार छुट्टी घोषित कर दी है और लोगों के लिए फ्यूल पास सिस्टम शुरू किया है। मिस्र में सरकार ने दुकानों और मॉल को जल्दी बंद करने का आदेश दिया है। साथ ही पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम 15 से 22ः तक बढ़ा दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम जरूरी था, नहीं तो हालात और खराब हो सकते थे। एक्सपर्ट का कहना है कि इन देशों में आम लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खाने और ईंधन पर खर्च करते हैं। ऐसे में कीमत बढ़ने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। साथ ही, डॉलर के मुकाबले इन देशों की मुद्रा कमजोर हो रही है, जिससे तेल आयात और महंगा हो गया है।
हमें भरोसेमंद साथियों की जरूरत – UAE
न्।म् के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गरगश ने कहा है कि उनके देश को इस समय ज्यादा सेना या हथियारों की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि UAE को साफ पता होना चाहिए कि मुश्किल समय में कौन-से देश उसके साथ खड़े होंगे। यानी उन्हें अपने सहयोगियों पर भरोसा और स्पष्ट समर्थन चाहिए। गरगश ने यह भी कहा कि न्।म् पहले ही दिखा चुका है कि वह चुनौतियों का सामना कर सकता है, लेकिन अब उसे मजबूत और भरोसेमंद साथियों की जरूरत है। इससे पहले उन्होंने अरब लीग और व्प्ब् जैसे संगठनों पर भी सवाल उठाए थे कि इस संकट के समय उनकी भूमिका क्यों नजर नहीं आ रही।
कनाडा ने लेबनान में इजराइली हमलों का विरोध किया
कनाडा ने इजराइल की उस योजना का विरोध किया है, जिसमें वह दक्षिणी लेबनान में घुसकर वहां कंट्रोल करने की तैयारी कर रहा है। कनाडा ने कहा है कि लेबनान की जमीन और उसकी आजादी का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक होनी चाहिए। उसने सभी पक्षों से आम लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील भी की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने अब तक लेबनान में इजराइली हमलों से 1,000 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। लगातार हमलों की वजह से करीब 10 लाख लोग बेघर हो गए हैं। फ्रांस ने भी इजराइल को चेतावनी दी है कि वह लेबनान में जमीनी हमला न करे, क्योंकि इससे आम लोगों को बहुत नुकसान होगा और हालात और बिगड़ जाएंगे।
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इजराइल का कहना है कि वह लेबनान के दक्षिणी हिस्से में करीब 30 किलोमीटर अंदर तक, लितानी नदी तक एक बफर जोन बनाना चाहता है। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि जब तक वहां स्थिति सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक वहां के लोग वापस अपने घर नहीं लौट पाएंगे।
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