AI : गूगल के AI मॉडल Gemini ने साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान 3 कंपनियों के कंप्यूटिंग सिस्टम और वेबसाइट्स को बिना किसी इंसानी मदद के हैक कर लिया। यह पहला ऐसा मामला है, जहां गूगल का कोई एआई मॉडल खुद से किसी असली सिस्टम में घुस गया। साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग कंपनी ने 18 सितंबर को इसके बारे में जानकारी दी। हालांकि कंपनी इररेगुलर साइबर सिक्योरिटी की टेस्टिंग कर रही थी।
AI मॉडल की ट्रेनिंग में बदलाव
जानकारी के अनुसार जैसे ही AI को यह अहसास हुआ कि ये कंपनियां असली हैं, उसने तुरंत अपना ऑपरेशन रोक दिया। गूगल ने इस टेस्टिंग के बाद कहा है कि एआई मॉडल की ट्रेनिंग में बदलाव करेंगे। इससे पहले मेटा, एंथ्रोपिक के एआई भी हैकिंग कर चुके हैं।
गूगल करेगा टेस्टिंग में बदलाव की तैयारी
गूगल की वाइस प्रेसिडेंट ऑफ सिक्योरिटी इंजीनियरिंग हीथर एडकिंस ने बताया कि तीनों प्रभावित कंपनियों को इसकी जानकारी दे दी गई है और जांच के तरीकों में जरूरी सुधार कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला दिखाता है कि ताकतवर एआई मॉडल्स को जिम्मेदारी से काम करने की ट्रेनिंग देना कितना जरूरी है।
मेटा, ओपन एआई और एंथ्रोपिक के साथ ऐसी दिक्कतें
इररेगुलर फर्म के मुताबिक, यह समस्या सिर्फ गूगल तक सीमित नहीं थी, बल्कि ओपन एआई, मेटा और एंथ्रोपिक जैसी बड़ी एआई कंपनियों के साथ भी ऐसा हुआ है। जुलाई में ही सभी कंपनियों को इसकी जानकारी दे दी गई थी। फर्म ने बताया कि सुरक्षा की सभी खामियों को हफ्तों पहले ही ठीक कर लिया गया है और अब जांच के नए और बेहतर तरीके बनाए जा रहे हैं।
ऑटोनॉमस एआई की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल
जैसे-जैसे एआई मॉडल्स खुद से फैसले लेने और इंटरनेट चलाने में सक्षम हो रहे हैं, उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि अगर सख्त सुरक्षा नियम नहीं लगाए गए, तो यह डिजिटल दुनिया को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
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