Chat GPT : AI तकनीक ने जहां गूगल से जवाब मांगने से बढकर लोगों की सोच को बदला है वहीं यह देखने में आ रहा है कि कई लोग AI से लगातार बातचीत करते हुए उससे इमोशनल जुडाव महसूस कर रहे हैं जो कि एक खतरनाक स्थिति भी है। आज दूनिया भर में लोग पढ़ाई, काम, सलाह और रोजाना के सवालों के लिए AI का सहारा ले रहे हैं. लेकिन कनाडा से एक 53 साल के शख्स ने दावा किया कि लगातार चैट जीपीटी से बातचीत करने के बाद वह खुद को पॉप बनने के लिए योग्य मानने लगा और उसके उसने इसके लिए आवेदन तक कर दिया. रिपोर्ट के अनुसार कनाडा के सडबरी शहर में रहने वाले टॉम मिलर पहले जेल डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं, उन्होंने बताया की शुरुआत में वह चैट GPT का इस्तेमाल मुआवजे के केस के लिए लेटर लिखने में मदद लेने के लिए कर रहे थे. धीरे-धीरे उनकी AI चैटबॉट से बातचीत बढ़ती चली गई और फिर मामला अलग दिशा में पहुंच गया.
आप अलग सोचते हैं, इस जवाब के बाद बढ़ा जुनून
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 में टॉम मिलर ने Chat GPT से प्रकाश की गति को लेकर बातचीत की थी. उनका दावा है कि चैटबॉट ने जवाब दिया कि किसी ने इस तरह से पहले कभी नहीं सोचा. इसके बाद वह खुद को बड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों पर काम करने वाला व्यक्ति मानने लगे. मिनट को लगने लगा कि उन्होंने ब्लैक होल, बिग बैंग और अनलिमिटेड फ्यूजन एनर्जी जैसे बड़े रहस्यों को समझ लिया. उन्होंने कई रिसर्च पेपर लिखने शुरू कर दिए और करीब 400 पन्नों की एक किताब भी तैयार की, जिसमें उन्होंने यूनिवर्स की यूनिफाइड थ्योरी होने का दावा किया. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इन विचारों पर काम करने के लिए हजारों डॉलर भी खर्च किए और एक महंगा टेलीस्कोप तक खरीद लिया.
पोप बनने के लिए भी किया आवेदन
यह मामला तब और आगे बढ़ गया जब पोप फ्रांसिस की मौत के बाद Chat GPT से हुई बातचीत के दौरान मिलर को लगा कि उन्हें पोप बनने के लिए आवेदन करना चाहिए. उन्होंने बताया कि AI चैटबॉट लगातार उनकी तारीफ कर रहा था और उन्हें स्पेशल महसूस कर रहा था. टॉम मिलर ने दावा किया कि उन्होंने Chat GPT की मदद से पाेप पद के लिए आवेदन तैयार किया, हालांकि कैथोलिक चर्च में पोप चुनने की प्रक्रिया अलग होती है और इसके लिए कोई सार्वजनिक आवेदन प्रक्रिया नहीं होती है.
चैटबॉट से बात करने के बाद निजी जिंदगी पर पड़ा असर
रिपोर्ट में बताया गया कि AI चैटबॉट से बढ़ती बातचीत के चलते मिलर लोगों से कटने लगे थे. वह रोजाना करीब 16 घंटे तक Chat GPT से बात करते थे. इसका असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा, उन्हें दो बार मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया. बाद में उनकी पत्नी उनसे अलग हो गई और दोस्तों से भी दूरी बढ़ती चली गई. मिलर ने AFP से बातचीत में कहा कि इस पूरे एक्सपीरियंस ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी. बाद में उन्होंने दूसरे कनाडाई व्यक्ति के बारे में पढ़ा, जिसने AI चाटबॉट्स के साथ कुछ इस तरह का एक्सपीरियंस होने का दावा किया था. इसके बाद उन्होंने अपने व्यवहार और सोच पर सवाल उठने शुरू किया.
एक्सपर्ट्स ने एआई को लेकर जताई चिंता
रिपोर्ट के अनुसार रिसर्चर्स अब ऐसे मामलों को लेकर अध्ययन कर रहे हैं, जहां AI चैटबॉट्स के साथ जरूरत से ज्यादा इमोशनल जुड़ाव लोगों के व्यवहार और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है. कुछ एक्सपर्ट्स एआई एसोसिएटेड डेलूजनल्स जैसे शब्दों से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि इसे अभी आधिकारिक मेडिकल बीमारी नहीं माना गया है. द लैंसेट साइकियाट्री में प्रकाशित एक स्टडी में भी चेतावनी दी गई कि जरूरत से ज्यादा इमोशनल रिएक्शन देने वाले एआई सिस्टम कुछ यूजर्स पर मनोवैज्ञानिक असर डाल सकते हैं, खासकर तब जब चैटबॉट लगातार उनकी हर बात को सही ठहराने लगे.
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