Modification: आजकल कार लेने वालों में अपने वाहनों को पर्सनलाइज यानी कस्टमाइज कराने का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है. लोग अपनी गाड़ियों को दूसरों से अलग और कूल लुक देने के लिए बाजार से तरह-तरह के आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज और मॉडिफिकेशन्स करवाते हैं। फैंसी और क्रेजी दिखने की यह चाहत बहुत बड़ी कानूनी मुसीबत में डाल सकती है. भारत के मोटर व्हीकल एक्ट के तहत देश में कई बेहद लोकप्रिय कार मॉडिफिकेशन्स को पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अगर आप इन प्रतिबंधित बदलावों के साथ सड़क पर निकलते हैं, तो ट्रैफिक पुलिस आपको कहीं भी रोककर ऑन-द-स्पॉट भारी-भरकम चालान थमा सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी गाड़ी की जांच कर लें और समझ लें कि कौन से वो 5 बदलाव हैं जो आपको सीधे कानून की नजर में गुनाहगार हो सकते हैं-
फैंसी हॉर्न लगवाना पूरी तरह से प्रतिबंधित
गाड़ी में प्रेशर हॉर्न, एयर हॉर्न या फिर मल्टी-टोन वाले फैंसी हॉर्न लगवाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, सड़कों पर केवल उन्हीं हॉर्न की अनुमति है जो तय डेसिबल सीमा के भीतर एक स्पष्ट और सिंगल टोन वाली आवाज पैदा करते हैं. फिल्मों के गानों या ड्रामा वाली आवाज निकालने वाले हॉर्न ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं. इसके साथ ही यह अचानक सड़क पर चलने वाले अन्य चालकों या पैदल यात्रियों को डराकर बड़ी दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकते हैं. ऐसे हॉर्न पकड़े जाने पर पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है.
डिजाइनर और फैंसी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट
अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट पर स्टाइलिश फॉन्ट का इस्तेमाल करना, रंग-बिरंगे बैकग्राउंड लगाना या नंबरों के ऊपर किसी भी तरह का स्टिकर चिपकाना एक गंभीर दंडनीय अपराध है. सरकार के कड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक, देश के हर वाहन पर केवल हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट ही लगी होनी चाहिए, जिसका एक तय साइज और मानक होता है. यदि आपकी नंबर प्लेट का साइज छोटा-बड़ा है या उस पर कोई नाम या पद लिखा हुआ है, तो ट्रैफिक पुलिस बिना किसी चेतावनी के आपका चालान काट देगी।
खिड़कियों पर ब्लैक फिल्म या आफ्टरमार्केट विंडो टिंटिंग
यह भारत में सबसे आम और सबसे ज्यादा दण्डित होने वाला मॉडिफिकेशन है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि गाड़ियों के शीशों पर बाहर से किसी भी तरह की टिंटेड फिल्म या सन फिल्म लगाने की अनुमति नहीं है. यह नियम कार की सामने वाली विंडशील्ड और साइड की सभी खिड़कियों पर समान रूप से लागू होता है. सुरक्षा कारणों और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से इस नियम को बेहद कड़ाई से लागू किया जाता है, इसलिए शीशों को काला करने से पूरी तरह बचें।
लाउड साइलेंसर और मॉडिफाइड एग्जॉस्ट सिस्टम
कई युवा अपनी सामान्य कारों से रेसिंग कार या स्पोर्ट्स कार जैसी आवाज निकालने के लिए आफ्टरमार्केट लाउड एग्जॉस्ट सिस्टम लगवा लेते हैं. ऐसे मॉडिफाइड साइलेंसर न केवल कानूनी डेसिबल सीमा का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वे गाड़ी के उत्सर्जन मानकों के साथ भी छेड़छाड़ करते हैं. इससे पर्यावरण को दोहरा नुकसान पहुंचता है. पुलिस अब सड़कों पर विशेष रूप से साउंड मीटर लेकर ऐसे वाहनों की चेकिंग कर रही है और पकड़े जाने पर भारी जुर्माने के साथ साइलेंसर को जब्त किया जा रहा है.
बुल बार्स और क्रैश गार्ड्स लगाने की बड़ी भूल
अक्सर एसयूवी गाड़ियों के मालिक अपनी कार को एक आक्रामक और रफ-टफ लुक देने के लिए सामने की तरफ लोहे या स्टील के बड़े-बड़े बुल बार्स (क्रैश गार्ड्स) लगवा लेते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कई साल पहले सुरक्षा कारणों से इन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था. दरअसल, दुर्घटना के समय ये गार्ड्स पैदल चलने वाले लोगों और छोटी गाड़ियों के लिए जानलेवा साबित होते हैं. इसके अलावा, क्रैश गार्ड लगे होने से कार के अंदर मौजूद एयरबैग्स के सेंसर भी समय पर काम नहीं कर पाते हैं. इसलिए अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए इन्हें तुरंत अपनी कार से हटा दें.
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