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गजब MP पुलिस! 12वीं के टॉपर को बस से उतारा, पकड़ा दी 2.7KG अफीम

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक 12वीं कक्षा के टॉपर छात्र को पुलिस ने न सिर्फ चलते बस से जबरन उतार लिया, बल्कि उस पर कथित रूप से 2.7 किलो अफीम ले जाने का आरोप लगाकर ड्रग तस्करी का केस भी दर्ज कर दिया। मामला सामने आने के बाद परिवार में आक्रोश है और अब पूरा प्रकरण हाई कोर्ट में चर्चा का विषय बन गया है।


चलती बस से उतार ले गए छात्र, परिजनों ने बताया—‘अपहरण जैसा था पूरा मामला’

पीड़ित छात्र किसी काम से बाहर जा रहा था। रास्ते में अचानक पुलिसकर्मी बस में चढ़े और बिना किसी वैध कारण बताए उसे नीचे उतरने को कहा। परिवार का कहना है कि न तो किसी कागज़ी प्रक्रिया का पालन किया गया और न ही गिरफ्तारी की कोई सही वजह बताई गई। शाम होते-होते पुलिस ने दावा किया कि छात्र से 2.7 किलो अफीम बरामद की गई है, जबकि परिजनों का आरोप है कि यह पूरी कहानी पुलिस की तरफ से रची गई है।


हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान, SP को भी बुलाया गया

मामले की गंभीरता देखते हुए हाई कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में ही जिले के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। अदालत में SP ने कई महत्वपूर्ण बातें स्वीकार कीं, जो पुलिस कार्रवाई की सच्चाई पर और ज्यादा सवाल खड़े करती हैं।

SP ने माना—
  • छात्र को बस से उतारने की प्रक्रिया कानूनी तौर पर गलत थी

  • गिरफ्तारी की उचित वजह दर्ज नहीं की गई

  • जरूरी मानक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ

यह स्वीकारोक्ति पुलिस के शुरुआती दावों को सीधे-सीधे कटघरे में खड़ा करती है।


पुलिस के पहले दावों में विरोधाभास, छह पुलिसकर्मी सस्पेंड

पहले पुलिस रिपोर्ट में कहा गया था कि बस में गए लोग पुलिसकर्मी नहीं थे और उनकी पहचान स्पष्ट नहीं है। लेकिन कोर्ट में SP ने बताया कि कार्रवाई पूरी तरह मल्हारगढ़ थाने की टीम ने की थी और सभी लोग पुलिस वाले ही थे।
इस बड़े विरोधाभास के बाद छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच शुरू हो चुकी है।


अदालत में आदेश सुरक्षित, अगली सुनवाई पर टिकी नज़रें

हाई कोर्ट ने छात्र के पक्ष की दलीलों, दस्तावेज़ों और पुलिस द्वारा मानी गई गड़बड़ियों को ध्यान से सुना और मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब अगली तारीख पर ही यह तय होगा कि छात्र को न्याय मिलेगा या नहीं।

यह मामला बताता है कि एक गलत कार्रवाई कैसे एक प्रतिभाशाली छात्र के भविष्य को खतरे में डाल सकती है। फिलहाल सभी की नज़रें कोर्ट के आगामी फैसले पर हैं।

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