Lord Shiv : सनातन शास्त्रों में एक पौराणिक कथा है कि ब्राह्मंड की रक्षा के लिए भगवान शिव और भगवान विष्णु इन दोनों दिव्य शक्तियों के आमने-सामने हो गए। उस समय महादेव ने शरभ अवतार लिया था. शिव के शरभ अवतार का संबंध भगवान विष्णु के उग्र रूप नरसिंह देव से जुड़ी है। शिव पुराण में वर्णित इस कथा के अनुसार, महादेव ने भगवान नरसिंह के क्रोध को शांत करने के लिए शरभ अवतार लिया था. शरभ अवतार भगवान शिव के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी अवतारों में शामिल है. शरभ अवतार आधा सिंह, आधा पक्षी और आठ पैरों वाला था. कथा के अनुसार. दैत्यराज हिरण्यकश्यप तीनों लोकों में अत्याचार कर रहा था. उसके अंत के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया।
देवताओं ने की शिव से प्रार्थना
भगवान विष्णु का आधा शरीर सिंह और आधा नर का था. हालांकि, दैत्य के अंत के बाद भी नरसिंह भगवान का क्रोध शांत नहीं हुआ. उनका क्रोध इतना प्रचंड था कि देवता और ऋषि मुनि भी डर गए. सभी को इस बात की चिंता सताने लगी कि अगर भगवान का क्रोध शांत नहीं हुआ तो संसार तबाह हो सकता है. फिर सभी देवता मिलकर भगवान शिव की शरण में पहुंचे और उनसे संसार को नरसिंह देव के क्रोध बचाने की प्रार्थना की। महादेव ने पहले हालात को संभालने के लिए अपने अंशावतारवीरभद्र को भगवान नरसिंह के पास भेजा. वीरभद्र ने उनसे शांत होने का अनुरोध किया, लेकिन फिर नरसिंह भगवान शांत न हुए. जब सभी प्रयास असफल हो गए, तब भगवान शिव ने ब्रहाांड को बचाने के लिए शरभ अवतार लिया. धर्म शास्त्रों में शरभ अवतार का स्वरूप अत्यंत विशाल और प्रभावशाली मना गया है. उनके विशाल पंख थे और पंजे बेहद शक्तिशाली थे.
शरभ अवतार ने नरसिंह देव में हुआ संघर्ष
शरभ अवतार और नरसिंह भगवान के आमने-सामने आने के बाद दोनों के बीच भयंकर संघर्ष हुआ. शिव पुराण के अनुसार, शरभ देव ने अपनी शक्ति से नरसिंह भगवान को काबू में किया. उन्हें अपने पंजों में उठाकर आकाश की ओर ले गए. फिर धीरे-धीरे उनका क्रोध शांत हो गया. इसके बाद उनको समझ में आया कि भगवान नरसिंह महादेव ने ये पूरी लीला सृष्टि के संतुलन और रक्षा के लिए रची थी. उन्होंने भगवान शिव को प्रणाम किया औरबैकुंठ धाम चले गए.
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