Jwala Devi Mandir: हिमाचल प्रदेश की ठंडी और बर्फीली पहाड़ियों के बीच एक ऐसा दिव्य स्थल है, जहाँ सदियों से आग जल रही है – बिना किसी ईंधन, बिना बाती और बिना घी के। यह कोई साधारण मंदिर नहीं, बल्कि माँ ज्वाला देवी का प्राचीन और रहस्यमयी शक्तिपीठ है, जहाँ ज्वाला खुद देवी का स्वरूप मानी जाती है।चैत्र नवरात्र के पावन मौके पर माँ ज्वाला देवी मंदिर और भी ज्यादा भक्तों से गूंज उठता है। यहाँ गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है। इसके बजाय एक अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहती है, जो चौबीसों घंटे, साल दर साल बिना रुके जल रही है। भक्त इसे माँ का साक्षात् रूप मानकर पूजा करते हैं।
मंदिर में जलती हैं,कुल नौ ज्वालाएँ
मंदिर में कुल नौ ज्वालाएँ लगातार जलती हैं। इन्हें माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों – महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, हिंगलाज भवानी, विंध्यवासिनी, अन्नपूर्णा, चंडी, अंजना और अंबिका देवी का प्रतीक माना जाता है। इन्हीं ज्वालाओं के कारण इस जगह को ज्वालामुखी भी कहा जाता है।यह मंदिर भारत के 51 प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि जब देवी सती ने यज्ञकुंड में अपने प्राण त्याग दिए, तो भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए। इनमें से देवी की जीभ यहीं गिर पड़ी थी। उसी जीभ का दिव्य प्रतीक आज भी ज्वाला के रूप में जल रहा है।
ज्वाला का अनसुलझा रहस्य
इस ज्वाला का रहस्य आज तक अनसुलझा है। यहाँ प्रसाद चढ़ाने पर वह जलता नहीं, बल्कि ज्वाला और तेज हो जाती है। कई भक्त बताते हैं कि चरणामृत में भी ज्वाला के दर्शन होते हैं। मुगल बादशाह अकबर ने भी इस ज्योति को बुझाने की बहुत कोशिश की। उसने नदी का पानी ज्वाला की ओर मोड़ दिया, लेकिन लौ नहीं बुझी। बाद में अकबर नंगे पैर चलकर मंदिर आया और सोने का छत्र चढ़ाया, जो आज भी वहाँ मौजूद है, लेकिन अब वह सोने की जगह किसी अज्ञात धातु में बदल चुका है।समय के साथ कई राजवंश आए और गए, मुगल और अंग्रेजी हुकूमत चली, लेकिन माँ ज्वाला की यह अखंड ज्योति आज भी ठीक उसी तरह जल रही है। वैज्ञानिक आज तक इसके पीछे का सही कारण नहीं ढूंढ पाए हैं। कुछ इसे प्राकृतिक गैस से जोड़ते हैं, तो कुछ इसे शुद्ध आस्था और दिव्य शक्ति का चमत्कार मानते हैं।
नवरात्र के दौरान यह मंदिर और भी दिव्य और भव्य रूप ले लेता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु इस अखंड ज्योति के दर्शन करने कांगड़ा पहुंचते हैं। अगर आप भी सच्ची भक्ति और चमत्कार को महसूस करना चाहते हैं, तो एक बार माँ ज्वाला देवी के इस पावन धाम में जरूर जाएँ।



