Saraswati Yog : वैदिक ज्योतिष में सरस्वती योग को अत्यंत शुभ और दुर्लभ योगों में गिना जाता है। नाम के अनुरूप यह योग जातक को ज्ञान, विद्या, वाणी और बौद्धिक क्षमता देने में मदद करता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की स्थिति, संयोग के हिसाब से विभिन्न तरह के शुभ और अशुभ योगों का निर्माण होता है। ऐसे ही जन्म के समय कुंडली में कुछ ऐसे राजयोगों का निर्माण होता है कि व्यक्ति राजसी सुख पाने के साथ-साथ पद-प्रतिष्ठा, सुख-समृद्धि पाता है। ऐसे ही बुध, गुरु और शुक्र की कुछ स्थितियों के कारण सरस्वती नामक योग का निर्माण होता है।
विद्वान, शास्त्रों का ज्ञाता
ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के अनुसार, जिस व्यक्ति की कुंडली में सरस्वती योग का निर्माण होता है, तो अवश्य ही विद्वान, वाक्पटु, साहित्य और शास्त्रों का ज्ञाता तथा समाज में सम्मानित होता है। आइए आज ‘कुंडली रहस्य’ श्रृंखला में जानते हैं कि जन्म कुंडली में सरस्वती योग कैसे बनता है और इसके क्या-क्या शुभ फल प्राप्त होते हैं।
कैसे बनता है सरस्वती योग?
फलदीपिका के छठे अध्याय ‘योग’ में सरस्वती योग के बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। अगर बुध, बृहस्पति और शुक्र लग्न से केंद्र (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव), त्रिकोण (पंचम और नवम भाव) या द्वितीय भाव में स्थित हों और बृहस्पति स्वराशि, मित्र राशि या उच्च राशि में बलवान अवस्था में हो, तो सरस्वती योग का निर्माण होता है।
शुक्रवाक्पतिसुधाकरात्मजैः केन्द्रकोणसहितैर्द्वितीयगैः ।
स्वोच्चमित्रभवनेषु वाक्पतौ वीर्यगे सति सरस्वतीरिता ॥ २६ ॥
सरस्वती योग का फल
फलदीपिका के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सरस्वती योग है, तो वह अत्यंत बुद्धिमान होने के साथ विद्वान बनता है। साहित्य, काव्य, गद्य, पद्य, नाटक, अलंकार शास्त्र तथा गणित जैसे विषयों में विशेष दक्षता होती है। वह लेख, साहित्य क्षेत्र में नाम रोशन करने के साथ-साथ पारंगत पंडित बनता है। वह चारों ओर से प्रसन्ना, कीर्ति हासिल करता है। ऐसे व्यक्ति शास्त्रार्थ और विद्वत चर्चाओं में भी निपुण माना जाता है।
इस योग में जन्मे व्यक्ति काफी उत्कृष्ट वक्ता और ज्ञानवान बनाता है। उसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैलती है और समाज में इन्हें विशेष स्थान और सम्मान मिलता है। इतना ही नहीं ये आर्थिक रूप से काफी मजबूत होते हैं। धनवान होने के कारण इनके ऐशो आराम में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होता है। ये सुख-समृद्धि, पद-प्रतिष्ठा से परिपूर्ण होते हैं।
पारिवारिक सुख
फलदीपिका के अनुसार, जन्म कुंडली में सरस्वती योग बनने से ये व्यक्ति पत्नी, पुत्र और परिवार के सुख से युक्त होते हैं। इसके अलावा इन्हें उच्च पदस्थ लोगों, शासकों अथवा समाज के प्रभावशाली वर्गों से सम्मान और आदर मिलता है। इन्हें समाज में एक एलग सम्मान मिलता है। ये किस्मत से काफी धनी होते हैं। कुल मिलाकर सरस्वती योग में जन्मे जातकों को ज्ञान, यश, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है।
श्लोक
धीमन्नाटकगद्यपद्यगण नालङ्कारशास्त्रेष्वयं
निष्णातरू कविताप्रबन्धरचनाशास्त्रार्थपारंगतरू ।
कीर्त्याक्रान्तजगत्त्रयोऽतिधनिको दारात्मजैरन्वितः
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