हिंदू पंचांग में संक्रांति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. सालभर में 12 संक्रांतियां होती हैं, जिनमें धनु संक्रांति और मकर संक्रांति खास स्थान रखती हैं. अक्सर लोग इन दोनों को एक जैसा मान लेते हैं, जबकि इनके महत्व, फल और पूजा-विधि में स्पष्ट अंतर है. आइए जानते हैं कि दोनों संक्रांतियां एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं और किन उपायों से जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर किए जा सकते हैं.
धनु संक्रांति का महत्व
पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में धनु संक्रांति 16 दिसंबर को पड़ेगी. इस दिन सूर्य वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश करते हैं. इसी के साथ खरमास की शुरुआत होती है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है. इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं.
इस महीने भगवान विष्णु, सूर्य देव और श्रीकृष्ण की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है. तिल, गुड़, अनाज और वस्त्र का दान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है.
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति वर्ष 2026 में 14 जनवरी को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है. इसे देवताओं का दिन कहा जाता है. इस समय से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं.
गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान, तिल-गुड़ दान और खिचड़ी का विशेष महत्व माना गया है. कई क्षेत्रों में यह पतंगबाजी का प्रमुख त्योहार भी है.
धनु और मकर संक्रांति का अंतर
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सूर्य का गोचर: धनु संक्रांति पर सूर्य वृश्चिक से धनु में जाते हैं, जबकि मकर संक्रांति पर धनु से मकर में प्रवेश करते हैं.
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शुभ कार्य: धनु संक्रांति से खरमास शुरू होता है, इसलिए मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं. मकर संक्रांति से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है.
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त्योहार की प्रकृति: धनु संक्रांति पूजा और दान पर आधारित है, जबकि मकर संक्रांति दान के साथ उत्सव और उल्लास का पर्व है.
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अन्य नाम: धनु संक्रांति को धनुर्मास की शुरुआत माना जाता है, जबकि मकर संक्रांति को उत्तरायण कहा जाता है.
संकट दूर करने के उपाय
सूर्य देव को प्रसन्न करने के उपाय
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अर्घ्य देना: तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्योदय के समय अर्घ्य अर्पित करें.
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आदित्य हृदय स्तोत्र: इसका नियमित पाठ करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और संकट दूर होते हैं.
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लाल या नारंगी वस्त्र: संक्रांति के दिन इन रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.
दान का महत्व
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तिल का दान: काले और सफेद तिल का दान करने से सूर्य और शनि दोनों की कृपा प्राप्त होती है.
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गुड़ का दान: धन संबंधी समस्याएं कम होती हैं और भाग्य मजबूत होता है.
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कंबल या वस्त्र दान: जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र देने से राहु-केतु संबंधित बाधाएं दूर होती हैं.



