Sun : 17 February साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। ये न केवल खगोलीय घटना है बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस बार का सूर्य ग्रहण काफी खास होने वाला है, क्योंकि शनि की मूल त्रिकोण राशि कुंभ में लगने के साथ-साथ शुक्र, बुध, राहु और सूर्य जैसे शक्तिशाली ग्रहों का जमावड़ा लगा हुआ है। फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि को लगने वाला सूर्य ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से काफी खास माना जाता रहा है। इस अवधि में राहु के साथ-साथ चंद्रमा का काफी अधिक प्रभाव देखने को मिलने वाला है। ये सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। लेकिन इसका सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से अवश्य देखने को मिलने वाला है। आइए जानते हैं ज्योतिषीय गणना के आधार पर साल के पहले सूर्य ग्रहण से संबंधित हर एक जानकारी
कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण
ये सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका के कुछ हिस्सों, अटलांटिक महासागर, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया, मोजम्बीक, मॉरीशस, अंटार्कटिका सहित तन्जानिया और दक्षिण अमेरिकी देशों में दिखाई देगा।
गर्भवती महिलाएं रखें विशेष सावधानी
-सूर्य ग्रहण काल में नुकीली वस्तुओं जैसे सुई, चाकू, कैंची या अन्य धारदार चीजों का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस समय ऐसी वस्तुओं का प्रयोग अशुभ प्रभाव डाल सकता है।
-अक्सर ग्रहण को लेकर अनावश्यक चिंता या भय हो जाता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाओं को शांत रहना चाहिए, गहरी सांसें लेनी चाहिए और सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए।
-ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना शुभ माना जाता है। पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
-यदि सूर्य ग्रहण अमावस्या को पड़ रहा है। इसलिए ग्रहण के बाद दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
-ग्रहण काल में भगवान सूर्य के मंत्रों या अन्य धार्मिक मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है। इससे मन स्थिर रहता है
-सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आने वाला है। इसलिए इसका नकारात्मक प्रभाव ज्यादा नहीं देखने को मिलने वाला है।
बन रहा दुर्लभ संयोग
17 फरवरी को एक बहुत ही अद्भुत और विलक्षण घटना लगभग करीब 64 वर्षों के बाद आपके जीवन में घटित होने जा रही है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 17 फरवरी को कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र,,राहु और चंद्रमा का पंचग्रही योग बनेगा।
कैसा होगा सूर्य ग्रहण
साल का पहला सूर्य ग्रहण एक वलयाकार होगा। ऐसे में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और सूर्य के चारों ओर ‘रिंग ऑफ फायर’ जैसा नजारा बनता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण आरंभ होने के करीब 12 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। लेकिन ये ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। ऐसे में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
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सूर्य ग्रहण का भारत में सूतक काल मान्य होगा कि नहीं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण आरंभ होने के करीब 12 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। लेकिन ये ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। ऐसे में सूतक काल मान्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण की शुरुआत (आंशिक चरण)ः दोपहर 3ः26 बजे, वलयाकार चरण की शुरुआतः शाम 5ः12 बजे, ग्रहण का चरम/पीक समयः शाम 5ः42 बजे, ग्रहण की समाप्तिः शाम 7ः57 बजे,
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