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टाइप-2 डायबिटीज लिवर को पहुंचा रहा है नुकसान,क्या कहती है स्टडी?

Type 2 Diabetes:लिवर को पहुंचा रहा है नुकसान

Type 2 Diabetes: टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीज अक्सर सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल करने पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि यह बीमारी लिवर को भी अंदर से कमजोर कर सकती है। कई मरीजों को इसकी भनक तक नहीं लगती और समस्या गंभीर रूप ले लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर स्क्रीनिंग से इस छिपे खतरे को रोका जा सकता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए नया खतरा

डायबिटीज के मरीज आमतौर पर हार्ट, किडनी और आंखों की जांच कराते रहते हैं, लेकिन लिवर की स्थिति को नजरअंदाज कर देते हैं। वडोदरा के एसएसजी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज से जुड़ी एक बड़ी स्टडी में पता चला कि टाइप-2 डायबिटीज वाले कई लोगों में लिवर फाइब्रोसिस या सिरोसिस जैसी समस्याएं बिना किसी लक्षण के बढ़ रही हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया गया तो यह लिवर फेलियर का कारण बन सकती है।

स्टडी क्या कहती है?

द लैंसेट रीजनल हेल्थ – साउथईस्ट एशिया (अप्रैल 2026) में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, हर चार में से एक डायबिटीज मरीज को क्लिनिकली सिग्निफिकेंट लिवर फाइब्रोसिस है, जबकि हर बीस में से एक मरीज में प्रोबेबल सिरोसिस के संकेत मिले। ये समस्याएं बिना किसी बाहरी लक्षण के होती हैं, इसलिए इन्हें साइलेंट खतरा माना जा रहा है।

आंकड़े बताते हैं गंभीर स्थिति

स्टडी में पाया गया कि 26 प्रतिशत मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस के संकेत थे, 14 प्रतिशत में यह एडवांस्ड स्टेज पर पहुंच चुकी थी, जबकि 5 प्रतिशत मरीज सिरोसिस की कगार पर थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि फैटी लिवर न होने वाले मरीजों में भी 13 प्रतिशत को फाइब्रोसिस था और 4 प्रतिशत में सिरोसिस के जोखिम के संकेत मिले।

लक्षण क्यों नहीं दिखते?

डायबिटीज की वजह से लिवर में सूजन बढ़ती है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) या अब मेटाबोलिक डिस्फंक्शन-असोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज कहा जाता है। शुरुआती स्टेज में रूटीन ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड से इसका पता नहीं चल पाता। जब दर्द, थकान या पीलिया जैसे लक्षण दिखते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। यही वजह है कि डॉक्टर इसे छिपा हुआ किलर बता रहे हैं।

 कैसे करें बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज मरीजों को अब सिर्फ शुगर लेवल पर नहीं, बल्कि लिवर की भी नियमित जांच करानी चाहिए। साल में कम से कम एक बार फाइब्रोस्कैन या जरूरी टेस्ट करवाएं।

साथ ही स्वस्थ आदतें अपनाएं:

  • संतुलित डाइट लें, ज्यादा चीनी और फैट वाले खाने से बचें
  • रोजाना व्यायाम करें, कम से कम 30-45 मिनट वॉकिंग या एक्सरसाइज
  • वजन को कंट्रोल में रखें, खासकर पेट की चर्बी कम करें
  • डायबिटीज की दवाएं समय पर लें और डॉक्टर की सलाह मानें

इन छोटे-छोटे बदलावों से लिवर संबंधी जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज मरीज है तो तुरंत लिवर स्क्रीनिंग पर विचार करें।

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