Queen of Hearts AI : दिल्ली में हो रहे एआई सम्मेलन में भारत और फ्रांस ने एआई और हेल्थ को लेकर हाथ मिलाए हैं। एक स्टडी में बताया गया है कि Queen of Hearts AI से खतरनाक से खतरनाक हार्ट अटैक या साइलेंट अटैक भी, स्ट्रोक के बारे में चंद सेकेंड में पता चल सकेगा। इस वजह से डॉक्टर्स समय पर इलाज करके मरीज को नया जीवन दे सकेंगे।
एआई से हार्ट अटैक का इलाज
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह अध्ययन अमेरिका के तीन प्रमुख चिकित्सा केंद्रों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया था। द क्रिस्ट हॉस्पिटल, सिनसिनाटी डेविस हेल्थ, कैलिफोर्निया, हेल्थ ह्यूस्टन टेक्सास और बेल्जियम का हॉस्पिटल के डॉक्टर्स की टीम ने क्वीन ऑफ हार्ट्स एआई के साथ ये शोध किया है।
हार्ट अटैक के मरीज की रिपोर्ट को सेकेंडों में
डॉ. टिमोथी डी. हेनरी जो इस स्टडी के वरिष्ठ लेखक और द क्रिस्ट हॉस्पिटल में रिसर्च डायरेक्टर हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक हार्ट अटैक के मरीज की रिपोर्ट को कुछ सेकेंड में पढ़ सकता है। इससे मरीज को सही समय पर इलाज करने में काफी हद तक मदद मिलेगी।
गंभीर हार्ट अटैक की जल्द पहचान
डॉ. रॉबर्ट हरमन शोध के मुख्य लेखक और बेल्जियम के हॉस्पिटल में कार्डियोवैस्कुलर शोधकर्ता हैं। उनका मानना है कि Queen of Hearts AI संचालित ईसीजी विश्लेषण दोनों दुनियाओं का सबसे अच्छा परिणाम ला सकता है। यह गंभीर हार्ट अटैक की जल्द पहचान करता है और साथ ही अनावश्यक आपातकालीन अलर्ट को कम करता है।
भारतीय हार्ट मरीजों के लिए वरदान
शोध में बताया गया है कि तेजी से मरीज की रिपोर्ट को पढ़ने के कारण इलाज को 90 मिनट के भीतर करना अब आसान होगा। हार्ट अटैक के इलाज में हर एक मिनट कीमती होता है। यदि धमनी को 90 मिनट के भीतर नहीं खोला जाता है, तो मृत्यु का जोखिम तीन गुना बढ़ जाता है। Queen of Hearts AI तकनीक डॉक्टरों को जल्दी निर्णय लेने में मदद करती है, जिससे मरीज को सही समय पर उपचार मिल पाता है। लैंसेट की एक स्टडी बताती है कि भारत में 55ः मौतें समय पर इलाज न मिलने के कारण होती है। बीएम बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल की स्टडी कहती है कि भारत में 50ः मौतें अस्पताल पहुंचने से पहले घर पर होती हैं। इस हिसाब से एआई भारतीय मरीजों के लिए भी वरदान बन सकता है।
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एआई पर कितना भरोसा
अध्ययन में Queen of Hearts AI नामक एक एआई संचालित प्लेटफॉर्म का परीक्षण किया गया। इसके परिणामों से पता चला कि इस AI तकनीक ने पारंपरिक तरीकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। AI ने 92ः मामलों में सही पहचान की, जबकि पारंपरिक तरीकों में यह दर लगभग 71ः थी। वहीं, AI ने श्फाल्स पॉजिटिवश् (गलत अलार्म) के मामलों को 42ः से घटाकर केवल 8ः कर दिया। इस हिसाब से कहा जा रहा है कि ये भरोसेमंद है।
छोटी-छोटी से बात भी पकड़ लिया
यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 8,116 मरीजों के ईसीजी डेटा पर आधारित था, जिन्हें सीने में दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षणों के साथ भर्ती किया गया था। शोधकर्ताओं ने इन मरीजों के ईसीजी रिपोर्ट का विश्लेषण करने के लिए क्वीन ऑफ हार्ट्स नामक डीप-लर्निंग एआई मॉडल का उपयोग किया। इस अध्ययन की सबसे खास बात यह थी कि एआई ने न केवल मानक स्पष्ट हार्ट अटैक की पहचान की, बल्कि उन सूक्ष्म संकेतों को भी पकड़ा जो अक्सर अनुभवी डॉक्टरों या पारंपरिक मशीनों से छूट जाते थे।
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