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नींद में पैरों में क्रैम्प आना हो सकता है गंभीर, बीमारी का इशारा जानिए वजह और पहचान

LEG CRAMPS PROBLEM

Health- रात में सोते वक्त पैरों में अचानक तेज ऐंठन (Leg Cramps) होना सिर्फ नींद खराब करने वाली समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर में चल रही कई अंदरूनी बीमारियों की ओर भी संकेत कर सकता है।अक्सर लोग इसे पानी की कमी, थकावट या दिनभर खड़े रहने का असर मानकर अनदेखा कर देते हैं लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि पैरों में ऐंठन केवल डिहाइड्रेशन से नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई मेडिकल कारण हो सकते हैं।  यह समस्या बार-बार हो खासकर रात में या आराम की स्थिति में तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। शरीर शुरुआती लक्षणों के जरिए बीमारी की चेतावनी देता है।

आइए जानते हैं कि पैरों में क्रैम्प आने की संभावित वजहें क्या हो सकती हैं।

पैरों की धमनियों में रुकावट (Peripheral Artery Disease – PAD)

एक्सपर्ट के मुताबिक यदि चलते समय पैरों में दर्द या ऐंठन हो और आराम करने पर भी राहत न मिले, तो यह पैरों की आर्टरीज में ब्लॉकेज का संकेत हो सकता है। अगर लंबे समय तक इस परेशानी को नजरअंदाज किया जाए तो यह टिश्यू डैमेज और अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

नसों की कमजोरी

हमारे पैरों की नसें खून को वापस दिल तक पहुंचाने का काम करती हैं। जब ये नसें कमजोर हो जाती हैं या इनके वाल्व सही ढंग से काम नहीं करते तो खून पैरों में ही जमा होने लगता है। इससे पैरों में भारीपन सूजन और बार-बार ऐंठन की शिकायत हो सकती है। कई बार पैरों पर उभरी हुई नसें भी नजर आने लगती हैं। यह सिर्फ दिखने की समस्या नहीं बल्कि ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ा संकेत भी हो सकता है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी है कारण

मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे जरूरी मिनरल्स की कमी से मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पातीं। जब शरीर का केमिकल संतुलन बिगड़ता है तो मसल्स को गलत संकेत मिलने लगते हैं और वे अचानक सिकुड़कर ऐंठन पैदा कर देती हैं।

नसों से जुड़ी बीमारियां

नर्व डिसऑर्डर की वजह से होने वाली ऐंठन के साथ झनझनाहट, सुन्नपन या फैलता हुआ दर्द भी महसूस हो सकता है। अगर क्रैम्प के साथ जलन हो तो यह नसों पर दबाव या न्यूरोपैथी का संकेत हो सकता है, खासकर डायबिटीज के मरीजों में।

हार्मोनल और मेटाबॉलिक कारण

थायरॉयड की बीमारी, एनीमिया, विटामिन D या विटामिन B12 की कमी मांसपेशियों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।  ऐसी स्थितियों में पैर जल्दी थक जाते हैं और रात में बार-बार ऐंठन होने लगती है।

दवाओं का असर

कुछ मामलों में नई दवाएं शुरू करने के बाद पैरों में ऐंठन की समस्या सामने आ सकती है।अगर किसी दवा के बाद यह परेशानी शुरू हुई हो, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

सामान्य और गंभीर क्रैम्प में अंतर

एक्सरसाइज, डिहाइड्रेशन या लंबे समय तक बैठने के बाद कभी-कभार होने वाली ऐंठन आमतौर पर कुछ समय में खुद ठीक हो जाती है। ऐसे मामलों में कमजोरी या सुन्नपन नहीं रहता और इसे सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि ऐंठन लगातार हो, दर्द ज्यादा हो और नींद बार-बार टूटे, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है।

 

कब करानी चाहिए मेडिकल जांच?

  • हफ्ते में कई बार क्रैम्प हो
  • कई हफ्तों तक समस्या बनी रहे
  • साथ में कमजोरी, सुन्नपन या सूजन हो
  • स्किन का रंग बदलने लगे
  • नींद लगातार प्रभावित हो

तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। बुजुर्गों, डायबिटीज, थायरॉयड, किडनी रोग या नसों से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को खासतौर पर जांच जरूर करानी चाहिए।

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कौन-कौन सी जांच कराई जा सकती हैं?

डॉक्टर निम्न टेस्ट की सलाह दे सकते हैं

  • इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट
  • किडनी फंक्शन टेस्ट
  • ब्लड शुगर जांच
  • थायरॉयड प्रोफाइल
  • नर्व कंडक्शन स्टडी और EMG
  • डॉप्लर टेस्ट और वैस्कुलर इमेजिंग (अगर ब्लड सर्कुलेशन की समस्या का शक हो)

निष्कर्ष

पैरों में बार-बार होने वाली ऐंठन को मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। शरीर कई बार शुरुआती संकेतों के जरिए बीमारी की जानकारी देता है। जरूरत है समय रहते इन लक्षणों को पहचानने और उचित जांच कराने की। सेहत को लेकर सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।

यह भी देखें : “पायजामे का नाड़ा खींचना भी रे*प की कोशिश” – सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

DISCLAIMER – 

इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह या उपचार का विकल्प न मानें। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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