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चाय-कॉफी पीने से डिमेंशिया का खतरा कम और दिमाग लंबे समय तक फिट !

Tea or Coffee relaxe of mind

Health impact of Tea Coffee: चाय पीने को कुछ लोग सेहत के लिए सही मानते तो कुछ लोग इसके वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करते हुए दिमाग के लिए ठीक भी बताते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया है कि दिन में दो से तीन कप कॉफी या चाय पीने से डिमेंशिया होने का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है, लेकिन इससे अधिक मात्रा में कॉफी पीने से मस्तिष्क को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता। एक व्यापक अध्ययन में 1,31,821 अमेरिकी नर्सों और स्वास्थ्य पेशेवरों को शामिल किया गया, जिनके स्वास्थ्य पर शुरुआती 40 साल की उम्र से लेकर 43 वर्षों तक नजर रखी गई। इस अवधि में 11,033 लोगों यानी करीब आठ प्रतिशत में डिमेंशिया हुआ। हालांकि, सीमित मात्रा में कैफीनयुक्त कॉफी या चाय पीने वालों में डिमेंशिया होने की संभावना कम पाई गई। अध्ययन के अनुसार, 75 वर्ष या उससे कम आयु के लोगों में इसका प्रभाव सबसे अधिक देखा गया। रोजाना करीब 250-300 मिलीग्राम कैफीन (लगभग दो से तीन कप कॉफी) लेने वालों में डिमेंशिया का जोखिम 35 प्रतिशत तक कम पाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि इससे अधिक कैफीन लेने से कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला।

महिलाओं व पुरुषों पर अध्ययन

अध्ययन में शामिल महिलाओं ने बताया कि शुरुआत में वे प्रतिदिन औसतन साढ़े चार कप कॉफी या चाय पीती थीं, जबकि पुरुषों के लिए कॉफी की औसत खपत ढाई कप थी। अधिक कैफीन लेने वाले प्रतिभागी अपेक्षाकृत कम उम्र के थे, लेकिन वे शराब का अधिक सेवन करते थे, धूम्रपान करते थे और अधिक कैलोरी लेते थे, जो डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ाने वाले कारक माने जाते हैं। शोध में यह भी पाया गया कि कैफीन रहित कॉफी पीने वालों में स्मृति क्षय तेजी से हुआ।

वैज्ञानिक आधार

शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि लोग नींद की समस्या, उच्च रक्तचाप या हृदय संबंधी उन समस्याओं के बाद कैफीन रहित कॉफी की ओर रुख करते हैं, जो स्वयं संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़ी हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि कैफीन मस्तिष्क में उस एडेनोसिन नामक रसायन को अवरुद्ध करता है, जो डोपामिन और एसिटाइलकोलाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को दबाता है। उम्र बढ़ने और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों में ये न्यूरोट्रांसमीटर कम सक्रिय हो जाते हैं और कैफीन इस गिरावट को कुछ हद तक रोक सकता है।

अधिक मात्रा में कैफीन के नुकसान

अध्ययन में यह भी कहा गया कि अधिक मात्रा में कैफीन लेने से नींद प्रभावित हो सकती है और चिंता बढ़ सकती है, जिससे मस्तिष्क को होने वाले लाभ कम हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने 1908 में प्रतिपादित यर्क्स-डॉडसन नियम का हवाला देते हुए कहा कि अत्यधिक उत्तेजना मस्तिष्क को कमजोर कर सकती है। अन्य 38 अध्ययनों के विश्लेषण में भी समान परिणाम सामने आए, जिनके अनुसार कैफीन लेने वालों में डिमेंशिया का जोखिम, कैफीन न लेने वालों की तुलना में छह से 16 प्रतिशत तक कम पाया गया।

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इस व्यापक विश्लेषण में एक से तीन कप कॉफी को सबसे उपयुक्त मात्रा बताया गया। शोधकर्ताओं ने हालांकि कहा कि कप की मात्रा अलग-अलग हो सकती है और कॉफी में कैफीन की मात्रा उसके प्रकार और बनाने के तरीके पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बहुत कम मात्रा में कैफीन सतर्कता और मनोदशा में सुधार कर सकती है और अधिक मात्रा हमेशा बेहतर नहीं होती।

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