Heart : इस दौर में अचानक बढ रही मौतों के कई कारणों में एक प्रमुख कारण दिल की बीमारियां भी है। ये मौत का प्रमुख कारण भी हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, हृदय रोगों से हर साल लगभग 20.5 मिलियन (दो करोड़ से अधिक) लोगों की मौत हो जाती है। यह दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जिनमें से 80% से ज्यादा मौतें हार्ट अटैक के कारण होती हैं।
कम उम्र में भी खतरा
लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी के चलते अब कम उम्र में भी लोग दिल की बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी जानलेवा समस्याओं का खतरा 20 से कम आयु वालों में भी देखा जा रहा है।
बिना लक्षण के भी
विशेषज्ञ कहते हैं, कई बार हृदय रोग बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में धीरे-धीरे विकसित होते रहते हैं और मरीज को तब पता चलता है जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। यही वजह है कि मेडिकल साइंस अब इलाज से ज्यादा अर्ली डिटेक्शन यानी समय रहते पहचान पर फोकस कर रही है।
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एआई टूल सहायक
हृदय की गंभीर समस्याओं का जल्दी पता लगाने की दिशा में वैज्ञानिकों की टीम को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। शोधकर्ताओं ने बताया कि एआई टूल की मदद से करीब पांच साल पहले ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी को हार्ट फेलियर होगा या नहीं?
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AI बताएगा हार्ट को कितना खतरा
हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि अब रूटीन हार्ट स्कैन टेस्ट और एआई मिलकर कई साल पहले ही आपमें हार्ट फेलियर के खतरे का पता लगा सकते हैं। इसका मतलब है कि डॉक्टर जल्द ही उन मरीजों की पहचान कर पाएंगे जिन्हें इस जानलेवा बीमारी का ज्यादा खतरा है। इससे समय रहते इलाज भी शुरू हो सकेगा, जिससे मरीज की जान बचाना भी आसान हो सकेगा। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की क्लिनिकल डायरेक्टर, डॉ. सोन्या बाबू-नारायण कहती हैं, हार्ट फेलियर का पता अक्सर बहुत देर से चलता है। कभी-कभी तो ये तब सामने आता है जब मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। गौरतलब है कि हार्ट फेलियर और इससे संबंधित मौत के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2040 तक इसके केस दोगुना तक हो सकते हैं।



