Priyadarshan : प्रियदर्शन उन फिल्म निर्देशको में से हैं जो दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहते हैं। हेराफेरी भूल भुलैया, भागम भाग जैसी हिट कॉमेडी फिल्म को ध्यान में रखकर दर्शक जब शुक्रवार को भूत बंगला फिल्म देखने पहुंचा तो लगा कि प्रियदर्शन अपना पुराना असर इस फिल्म में नहीं छोड पाए हैं। हल्की फुल्की हॉरर सीन, औसत कॉमेडी को देखना हो तो एक बार भूत बंगला देखी जा सकती है। फिल्म भूत बंगला में अक्षय कुुमार और परेश रावत की जोड़ी इस बार वैसा कमाल नहीं दिखा पाती। फिल्म हॉरर, कॉमेडी और मिस्ट्री का मिक्स तो है, लेकिन इसका असर हर जगह बराबर नहीं दिखता।
फिल्म की कहानी
कहानी एक श्रापित गांव मंगलपुर की है जहां यह माना जाता है कि शादी करना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि यहां नई दुल्हन को वधुसुर नाम का राक्षस उठा ले जाता है। अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) लंदन में अपने पिता वासुदेव और बहन मीरा के साथ रहते हैं। मीरा की शादी तय होती है, तभी उन्हें पता चलता है कि उनके दादा 500 करोड़ की संपत्ति और मंगलपुर की हवेली मीरा के नाम कर गए हैं। अर्जुन, मीरा की शादी उसी पुश्तैनी हवेली में करने के लिए मंगलपुर पहुंचता है। लेकिन जैसे-जैसे शादी करीब आती है, हवेली में अजीब और डरावनी घटनाएं शुरू हो जाती हैं। इसी दौरान अर्जुन के सामने कई पुराने राज खुलते हैं और उसे पता चलता है कि मीरा ही वधुसुर के निशाने पर है, क्योंकि उसे मारकर वधुसुर अमर हो सकता है। अब कहानी इस सवाल पर आकर टिकती है कि क्या अर्जुन अपनी बहन और मंगलपुर को इस खतरे से बचा पाएगा।
स्टारकास्ट की एक्टिंग
अक्षय कुमार इस बार उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते। उनकी कॉमिक टाइमिंग, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है, यहां बनावटी और ज्यादा मेहनत करती हुई लगती है। राजपाल यादव की कॉमेडी ही कई जगह फिल्म को संभालती है। परेश रावल का काम ठीक-ठाक है, लेकिन उनसे जो उम्मीद रहती है, वो यहां नजर नहीं आती। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने आधे मन से अभिनय किया हो। फिल्म की लीड एक्ट्रेस वामिका गब्बी को बहुत कम स्क्रीन टाइम मिला है और अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री भी जबरदस्ती की लगती है। तब्बू, मिथिला पालकर और जेस्सु सेनगुप्ता जैसे कलाकारों का इस्तेमाल भी सीमित और अधूरा लगता है।
फिल्म का डायरेक्शन
प्रियदर्शन इस बार अपने ही बनाए मापदंडों पर खरे नहीं उतरते। फिल्म का स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ महसूस होता है, जहां पहला भाग काफी खिंचा हुआ और उबाऊ लगता है, वहीं दूसरा भाग थोड़ी रफ्तार पकड़ता है और कहानी को कुछ हद तक संभालता है। हॉरर एलिमेंट्स में साउंड का इस्तेमाल कुछ जगह असरदार है, लेकिन डर का माहौल लगातार नहीं बन पाता।
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फिल्म का म्यूजिक
प्रियदर्शन फिल्म का म्यूजिक इसका सबसे कमजोर पक्ष है। भूल भुलैया के गाने आज भी लोगों को याद हैं, लेकिन भूत बंगला का एक भी गाना ऐसा नहीं जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए।
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