Opposition Stage Overnight Protest: संसद ने ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025’ को बृहस्पतिवार को मंजूरी दी। इस विधेयक को पहले लोकसभा और देर रात राज्यसभा से पारित किया गया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक’ पारित किए जाने के खिलाफ संसद परिसर में बृहस्पतिवार (18 दिसंबर 2025) रात से शुक्रवार सुबह तक 12 घंटे का धरना दिया। सरकार के इस कदम का संसद में पुरजोर विरोध हुआ विरोध करते हुए विपक्ष रात भर ठंड़ में बेठे रहै (Opposition Stage Overnight Protest )के बाद विपक्षी दलों के सांसदों ने यह ऐलान भी किया कि अब वे सड़कों पर उतरेंगे। संसद ने अब ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी। वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने भी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार जिस तरह से ‘गरीब-विरोधी, जन-विरोधी, किसान-विरोधी और ग्रामीण गरीबों के खिलाफ’ विधेयक लाई और मनरेगा को खत्म कर दिया है, वह निंदनीय है।उन्होंने कहा, ‘यह भारत के गरीबों का अपमान है, यह महात्मा गांधी का अपमान है, यह रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान है। हमें सिर्फ पांच घंटे का नोटिस देकर इस विधेयक के बारे में सूचित किया गया। हमें इस पर उचित विचार-विमर्श करने की अनुमति नहीं दी गई।’
जी राम जी संसद से पास होने पर विपक्ष का 12 घंटे का धरना
सागरिका घोष ने कहा, ‘हमारी मांग थी कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को प्रवर समिति को भेजा जाए, ताकि विपक्षी दल इसकी गहन अवलोकन कर सकें, इस पर चर्चा कर सकें और सभी हितधारकों से विचार-विमर्श हो सके, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और तानाशाही का प्रदर्शन करते हुए लोकतंत्र की हत्या की गई। के बाद ‘ घोष ने कहा, ‘अब हम 12 घंटे का धरना दे रहे हैं। यह धरना नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जनता के खिलाफ, भारत के गरीबों के खिलाफ, ग्रामीण गरीबों के खिलाफ इस काले कानून को लाने के तरीके के विरोध में है।’
‘मजदूरों के लिए सबसे दुखद दिन’
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बिल पास होने को देश के श्रमिक वर्ग के लिए ‘सबसे दुखद दिन’ करार दिया। उन्होंने मोदी सरकार पर किसान-विरोधी और गरीब-विरोधी होने का आरोप लगाया। सुरजेवाला ने कहा, ‘यह भारत के लोकतंत्र में मजदूरों के लिए सबसे दुखद दिन है। भाजपा सरकार ने मनरेगा को खत्म करके 12 करोड़ लोगों की आजीविका पर हमला किया है। उन्होंने साबित कर दिया कि मोदी सरकार किसान-विरोधी और गरीब-विरोधी है।’
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‘नई योजना राज्यों पर भारी बोझ डालेगी’
कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने कहा, ‘मनरेगा का मसौदा तैयार करते समय 14 महीने तक विचार-विमर्श हुआ था और इसे संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था। यह नई योजना राज्यों पर अत्यधिक बोझ डालेगी, जिससे यह योजना असफल हो जाएगी।’ द्रमुक नेता तिरुचि शिवा ने कहा कि महात्मा गांधी और बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमाओं को संसद परिसर में पीछे की ओर शिफ्ट कर दिया गया है, जहां लोग उन्हें ठीक से देख नहीं सकते। अब योजना से राष्ट्रपिता का नाम हटाया जा रहा है, जिससे पूरा विपक्ष और देश के लोग आक्रोशित हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह बिल मनरेगा को कमजोर करेगा, गांधीजी का अपमान है और ग्रामीण गरीबों के हक छीनेगा। धरने में टीएमसी, कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के कई सांसद शामिल हुए।
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