Dr. Charul Singh : अपने जीवन में जो क्षेत्र चुनते हैं अच्छी सैलेरी भी उठाते हैं लेकिन स्थाई नौकरी नहीं मिलना, एक जगह ठहराव नहीं होने और पारिवारिक जिम्मेदारियां कई बार लोगों को अपने रास्ता बदलने पर मजबूर कर देती हैं। करियर की नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित करती हैं. ऐसा ही कुछ हुआ पीडियाट्रिक डेंटिस्ट डॉ. चारुल सिंह के साथ. करीब 1.25 लाख रुपए की सैलरी वाली नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने डिजिटल बिजनेस की शुरुआत की और महज 45 दिनों में 2 लाख रुपए की कमाई कर सबका ध्यान खींच लिया. उनकी यह यात्रा केवल आर्थिक सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, मातृत्व, कानूनी लड़ाई और नए अवसरों को अपनाने की कहानी भी है.
मेडिकल चुना काम किया और फिर बदलाव
डॉ. चारुल सिंह ने एक प्राइवेट कॉलेज से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की पढ़ाई पूरी की. शुरुआत में उन्हें लगा था कि सालों की मेहनत और पढ़ाई के बाद वे अब आर्थिक तौर पर मजबूत हो जाएंगी, लेकिन नौकरी शुरू करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि शुरुआती सैलरी उनकी उम्मीदों से काफी कम थी. इसके बाद उन्होंने कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी की और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में काम किया. बाद में उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा पास कर लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री में मास्टर्स किया.
सवा लाख तक पहुंची सैलरी
6 साल से ज्यादा का क्लीनिकल एक्सपीरियंस हासिल करने के बाद डॉ. चारुल प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट बनीं. उन्होंने बताया कि नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंसी के दौरान उन्हें करीब 92 हजार रुपए सैलरी मिलती थी. मास्टर्स के समय यह बढ़कर लगभग 1 लाख और सीनियर रेजिडेंट बनने के बाद उनकी सैलरी करीब 1.25 लाख रुपए तक पहुंच गई.
शादी, मातृत्व और कानूनी लड़ाई ने बदली सोच
मास्टर्स के दौरान उनकी शादी भारतीय सेना के एक अधिकारी से हुई. लगातार अलग-अलग स्थानों पर पोस्टिंग होने के कारण दोनों अक्सर अलग शहरों में रहते थे. इसी दौरान उन्होंने मां बनने का फैसला किया, जिससे अस्पताल की जिम्मेदारियों और पारिवारिक जीवन के बीच बैलेंस बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया. प्रेगनेंसी के दौरान उन्होंने लंबे समय तक अस्पताल में काम किया. बाद में राज्य बॉन्ड के तहत कार्य करते समय उन्हें मातृत्व अवकाश से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. उन्होंने इस पॉलिसी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी और कानूनी लड़ाई जीतने के बाद उन्हें अपने अधिकार मिले. इस अनुभव ने उन्हें अपना खुद का काम शुरू करने की प्रेरणा दी.
45 दिनों में कमाए पहले 2 लाख रुपए
पति के लगातार ट्रांसफर के कारण उनका मेडिकल करियर प्रभावित होने लगा. परमानेंट नौकरी न मिलने पर उन्होंने 6 महीने तक डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिजनेस के बारे में जानकारी हासिल की. जून 2025 में उन्होंने अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने पर्सनल ब्रांडिंग और स्टोरीटेलिंग पर काम किया. धीरे-धीरे क्लाइंट मिलने लगे और बिजनेस बढ़ता गया. डॉ. चारुल के अनुसार, डिजिटल सफर शुरू करने के सिर्फ 45 दिनों के भीतर उन्होंने अपने पहले 2 लाख रुपए कमाए. इसके बाद उनकी कमाई लगातार उनकी पुरानी सैलरी से ज्यादा होने लगी.
आज महिलाओं को सिखा रही हैं डिजिटल स्किल्स
आज डॉ. चारुल सिंह चारुल्स इनर सर्किल के जरिए भारत और विदेशों के क्लाइंट्स के साथ काम करती हैं. इसके साथ ही वह महिलाओं को डिजिटल स्किल्स, पर्सनल ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिजनेस की ट्रेनिंग देती हैं. हालांकि, उन्हें आज भी क्लीनिकल प्रैक्टिस की याद आती है, लेकिन उनका मानना है कि सेना की लगातार पोस्टिंग के बीच डिजिटल करियर ने उन्हें बेहतर इकोनॉमिक स्टेबिलिटी और वर्क-लाइफ बैलेंस दिया है. उनका कहना है कि मातृत्व महिलाओं के सपनों का अंत नहीं, बल्कि उन्हें नए तरीके से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.
यह भी पढ़ें –वित्त-मंत्री की नसीहत- IT जनता की भलाई के लिए काम करें, परेशानी के लिए नहीं
यह भी देखें –30 साल पुरानी कॉलोनियों पर JDA का शिकंजा, बुलडोजर के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा



