IT : देश में IT सेक्टर की कंपनियां भविष्य की योजनाओं पर निवेश पर ध्यान देने के बजाए डिविडेंट और बायबैक बांटने में लगी हैं। भारतीय कंपनियों की इस नीति से AI तकनीक में भारत के पिछड जाने की संभावना बन गई है। शेयर बाजार में भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देने वाली कंपनियों पर स्मार्ट निवेशक बहुत ध्यान देते हैं और यही कारण है कि ऐसे निवेशक जो IT कंपनियों में निवेश करते हैं उनमें यह नाराजगी फैल रही है कि भारतीय कंपनियां AI में निवेश नहीं कर रहीं जो कि आने वाले समय की सबसे बडी जरुरत बनेगी। शेयर बाजार में अक्सर निवेशक किसी कंपनी के कमजोर नतीजों पर नाराज होते हैं. लेकिन इस बार मामला सिर्फ खराब प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा. देश की आईटी कंपनियों और उनके मैनेजमेंट्स पर ऐसा तीखा हमला देखने को मिल रहा है। इस वजह से पूरे बाजार में एक बहस छेड़ दी है। एक कंपनी के एमडी का कहना है कि पिछले कई सालों से निवेशकों ने इन कंपनियों को जरूरत से ज्यादा ढील दी है। कंपनियां लगातार डिविडेंड और बायबैक का ऐलान कर रही हैं, लेकिन भविष्य की टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश नहीं कर रहीं. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कंपनियां लगातार बायबैक कर रही हैं, तो क्या इसका मतलब यह नहीं कि उनके पास ग्रोथ की कोई बड़ी ऑपर्च्युनिटी नहीं बची? जानकारों के मुताबिक जब कोई कंपनी खुद यह संकेत दे कि उसके पास निवेश करने के लिए बड़े मौके नहीं हैं और वह शेयरहोल्डर्स को पैसा वापस लौटाना ज्यादा बेहतर समझती है, तो बाजार आखिर उसे ऊंचा वैल्यूएशन क्यों दे?
दुनियाभर में AI पर निवेश
एक चर्चा के दौरान वित्तिय कंपनी के एमडी का कहना था कि दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर बड़े स्तर पर निवेश हो रहा है. ग्लोबल टेक कंपनियां भविष्य की टेक्नोलॉजी पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं. लेकिन भारत की IT कंपनियां अभी भी बायबैक और डिविडेंड पर ज्यादा फोकस करती दिखाई देती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने IT इंडस्ट्री को खड़ा करने के लिए सालों तक टैक्स बेनिफिट दिए. शुरुआती दौर में जमीन, टैक्स छूट और कई तरह की सुविधाएं दी गईं ताकि देश में मजबूत टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार हो सके. लेकिन एक्सपर्ट का कहना था कि कंपनियों ने उस मौके का पूरा फायदा उठाया, मगर भविष्य की टेक्नोलॉजी में उतना निवेश नहीं किया जितनी उम्मीद थी.
AI में भारत कहीं नहीं
उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि “इंडिया एआई के अंदर कहीं भी नहीं है.” उनके मुताबिक अगर कंपनियां समय रहते रिसर्च, इनोवेशन और नई टेक्नोलॉजी में आक्रामक निवेश करतीं, तो भारत आज एआई की रेस में कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में हो सकता था. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों ने अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा शेयरहोल्डर्स को लौटाने या निजी संपत्ति बनाने में खर्च किया, जबकि जरूरत देश के टेक्नोलॉजी भविष्य की नींव मजबूत करने की थी.
भारतीय IT कंपनियां नई दिशा खोजने में पीछे
देखने में आ रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल टेक इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है. एआई, ऑटोमेशन, क्लाउड और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में दुनिया भर में भारी निवेश हो रहा है. ऐसे समय में अगर भारतीय आईटी कंपनियां लगातार बायबैक और डिविडेंड पर ज्यादा जोर देती हैं, तो कुछ निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कंपनियों के पास भविष्य के लिए पर्याप्त बड़े आइडियाज और निवेश योजनाएं हैं?
निवेशक को फायदा
कई निवेशक यह भी मानते हैं कि डिविडेंड और बायबैक शेयरहोल्डर्स के लिए सकारात्मक कदम होते हैं. इससे निवेशकों को सीधा फायदा मिलता है और कंपनियां अपने मजबूत कैश फ्लो का संकेत देती हैं. लेकिन आलोचकों का कहना है कि सिर्फ कैश लौटाना ही काफी नहीं होता. अगर टेक्नोलॉजी सेक्टर को लंबे समय तक दुनिया में प्रतिस्पर्धी बने रहना है, तो रिसर्च और इनोवेशन में आक्रामक निवेश जरूरी होगा. एक्सपर्ट ने कहा कि जब कंपनियां अपेक्षित ग्रोथ नहीं दिखा पा रहीं, तब भी बड़े बोनस दिए जा रहे हैं. उनके मुताबिक यह निवेशकों के लिए निराशाजनक संदेश है.
बडा सवाल
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या भारतीय आईटी कंपनियां आने वाले वर्षों में एआई और नई टेक्नोलॉजी पर बड़ा दांव लगाएंगी ? या फिर निवेशकों की यह नाराजगी आगे और तेज होती जाएगी ?
पिछले कुछ समय से कई आईटी शेयर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और एआई की रेस में ग्लोबल प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है. फिलहाल इतना तय है कि इस बयान ने आईटी सेक्टर की रणनीति, मैनेजमेंट और भविष्य की दिशा पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है.
यह भी पढ़ें : पेट्रोल-डीजल संकट से निपटने के लिए केन्द्र सरकार की योजना, E21 और E25 फ्यूल लाने की तैयारी
यह भी देखें : 13 मई 2008 जयपुर की वो खौफनाक शाम जिसे आज भी कोई नहीं भूल पाया | KBP Times



