Foreign Investors : विदेशी निवेशकों को लेकर भारतीय शेयर बाजार के लिए दो दरवाजे बन गए हैं एक दरवाजे से विदेशी निवेशक अपना पैसा लेकर निकल रहे हैं तो दूसरे पर पैसा लिए खडे हैं। जानकारों के अनुसार भारतीय इक्विटी मार्केट से विदेशी निवेशकों का बाहर निकलने का सिलसिला जारी है. इन सबके बीच विदेशी निवेशकों का एक बड़ा वर्ग भारत में पैसा लगाने के लिए भी तैयार बैठा है. लेकिन ये वो निवेशक हैं जिनकी नजर इक्विटी मार्केट पर न होकर बॉन्ड मार्केट है. बॉन्ड मार्केट को लेकर सरकार के द्वारा उठाए गए ताजा कदमों और ब्लूमबर्ग इंडेक्स में संभावित एंट्री के बाद अब अनुमान है कि अगले डेढ़ साल में 27 अरब डॉलर यानि 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा भारतीय बाजार में आ सकते हैं. उम्मीदों का असर दिखा है और जून में निवेश में तेज उछाल देखने को मिला है.
बॉन्ड मार्केट का बढ़ा आकर्षण
विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड (Government Bonds) के तेजी से आकर्षण का केंद्र बनने की सबसे बड़ी वजह भारत के Bloomberg Global Aggregate Bond Index में संभावित एंट्री है. जिससे आने वाले वर्षों में अरबों डॉलर का विदेशी निवेश देश में आ सकता है. अनुमान है कि इससे रुपये की स्थिति सुधरेगी और आगे अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा.
सीएनबीसी की एक रिपोर्ट में DBS Bank के ट्रेजरी प्रमुख आशीष वैद्य ने कहा कि भारत को ब्लूमबर्ग इंडेक्स में करीब 0.7% वेटेज मिल सकता है. इससे वित्त वर्ष 2028 तक 25 से 27 अरब डॉलर (करीब ₹2.1–2.3 लाख करोड़) का विदेशी निवेश भारतीय बॉन्ड बाजार में आने का अनुमान है.
विदेशी निवेशकों की वास्तविक एंट्री
इंडेक्स में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है, लेकिन माना जा रहा है कि विदेशी निवेशकों की वास्तविक एंट्री 2027 की शुरुआत में हो सकती है. हालांकि बदलाव का असर दिखने भी लगा है. NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड में 7.7 अरब डॉलर का निवेश किया है. यह पूरे 2025 के 6.6 अरब डॉलर के निवेश से भी अधिक है. दिलचस्प बात यह है कि अकेले जून महीने में ही 5.8 अरब डॉलर का निवेश आया. इसी महीने सरकार ने विदेशी बॉन्ड निवेशकों के लिए टैक्स छूट की घोषणा की थी. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि ये पैसा उन एक्टिव इनवेस्टर्स की तरफ से आ रहा है जो आने वाले समय में पॉजिटिव संकेतों की उम्मीद में इंडेक्स में भारत की एंट्री से पहले ही बाजार में उतर रहे हैं. एक बार भारत के इंडेक्स का हिस्सा बनने पर इस निवेश का बड़ा हिस्सा पैसिव इनवेस्टर्स (Passive Investors) के हाथ जा सकता है. इसके अलावा खरीद का नया सिलसिला भी जारी रहेगा.
लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश आया
इससे पहले 2024 में भारत के सरकारी बॉन्ड को JPMorgan Government Bond Index-Emerging Markets में शामिल किए जाने के बाद लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश आया था. अब ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में संभावित एंट्री को उससे भी बड़ा अवसर माना जा रहा है, क्योंकि यह इंडेक्स उभरते और विकसित—दोनों तरह के बाजारों को कवर करता है. खास बात ये हैं कि सरकार के द्वारा उठाए गए ताजा कदमों से भारतीय बाजार और आकर्षक बनकर उभरा है.
क्या हुआ है बदलाव
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार द्वारा विदेशी बॉन्ड निवेशकों को दी गई टैक्स राहत ने इस दिशा में बड़ा रास्ता साफ किया है. भारत सरकार ने पिछले महीने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश पर लगने वाले 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स और 20% विदहोल्डिंग टैक्स को समाप्त कर दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि यही कदम भारत को ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल कराने की दिशा में सबसे अहम माना जा रहा है. वहीं सरकार ने 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड को Fully Accessible Route (FAR) के तहत भी शामिल किया है. इस व्यवस्था में विदेशी निवेश पर कोई सीमा नहीं होती. जून में FAR के तहत 2.3 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया, जो पिछले 14 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश रहा. HSBC का मानना है कि लंबी अवधि वाले बॉन्ड उपलब्ध होने से विदेशी पेंशन फंड और इंश्योरेंस कंपनियों जैसी संस्थाओं की दिलचस्पी और बढ़ सकती है, क्योंकि उन्हें लंबे समय के निवेश की आवश्यकता होती है.
यह भी पढ़ें : ई-20 पेट्रोल डालने से हाईब्रिड कार का इंजन हुआ खराब, कोर्ट ने कहा- कंपनी नई कार दे या 20 लाख लौटाए
यह भी देखें: भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित दावा, जवाब में 10 लाख का इनाम | KBP Times



