नोएडा से स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े और संगठित GST चोरी रैकेट का खुलासा करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी कंपनियां बनाकर, नकली इनवॉयस और ई-वे बिल के जरिए अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक की GST चोरी कर चुका है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क की जड़ें दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों तक फैली हुई हैं।
STF की कार्रवाई के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पूरे दिल्ली-NCR में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी अलग-अलग राज्यों में फर्जी फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराते थे और बिना किसी वास्तविक लेन-देन के भारी मात्रा में फर्जी सेल्स इनवॉयस और ई-वे बिल तैयार करते थे। कागजों पर बड़े व्यापार का दिखावा कर इन फर्जी कंपनियों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अवैध खरीद-फरोख्त की जाती थी।
ऐसे दिया जाता था GST चोरी को अंजाम
फर्जी लेन-देन को असली दिखाने के लिए आरोपी बैंक खातों के माध्यम से रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करते थे। इसके बाद पैसा कैश में निकाल लिया जाता या सर्कुलर ट्रांजैक्शन के जरिए घुमा दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास कई कंपनियों के GST पोर्टल लॉग-इन, पासवर्ड, OTP एक्सेस और मोबाइल नंबर मौजूद थे, जिससे वे आसानी से रिटर्न फाइल कर लेते थे।
STF ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, आधार कार्ड, ई-मेल डेटा, GST लॉग-इन डिटेल्स और नकदी बरामद की है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत मिले हैं, जो GST चोरी की पुष्टि करते हैं।
3 राज्यों में फैला नेटवर्क, नोएडा से होता था संचालन
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस (दिल्ली), जितेंद्र झा (समस्तीपुर, बिहार), पुनीत अग्रवाल (पश्चिमी दिल्ली) और शिवम (नई दिल्ली) के रूप में हुई है। STF के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड हरदीप सिंह है, जो नोएडा से पूरे नेटवर्क और अकाउंट्स को ऑपरेट करता था।
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यों में दर्जनों फर्जी फर्में रजिस्टर्ड कराईं। इन फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये की फर्जी GST रिटर्न दाखिल की गई। मोबाइल फोन की जांच में 30 से ज्यादा ई-मेल आईडी भी सामने आई हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग कंपनियों के नाम पर किया जा रहा था।
जांच जारी, और बड़े नाम आ सकते हैं सामने
STF अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआती चरण है। आगे की जांच में और फर्जी कंपनियों, लाभार्थियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। GST चोरी से जुड़े अन्य मामलों में भी इस गिरोह की भूमिका की जांच की जा रही है।
पूछताछ के दौरान जब आरोपियों के सामने बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत रखे गए तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। STF का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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