US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर चरम पर है. अमेरिका ने गुरुवार सुबह ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है. दोनों देशों के बीच लगातार दूसरे दिन सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है. ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, एयरबेस और नौसैनिक सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि अमेरिका ने अपने ऑपरेशन को सफल बताते हुए आगे भी कार्रवाई की चेतावनी दी है. इस बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़े विवाद से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है.
अमेरिका का नया हवाई हमला
अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की. ईरानी मीडिया के अनुसार केश्म द्वीप, बंदर अब्बास, मीनाब और सीरिक क्षेत्रों में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं. हालात को देखते हुए कई शहरों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान बातचीत को टाल रहा है, इसलिए उस पर दबाव बनाए रखना जरूरी है. अमेरिकी दावे के मुताबिक कार्रवाई में टॉमहॉक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया.
ईरान की जवाबी कार्रवाई का दावा
ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले 18 अहम ठिकानों को निशाना बनाया. इसके अलावा जॉर्डन स्थित अल-अजराक एयरबेस पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का भी दावा किया गया. हालांकि जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने कई मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है.
जॉर्डन में हाई अलर्ट
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने जॉर्डन में मिसाइल और ड्रोन हमले की आशंका को लेकर सुरक्षा चेतावनी जारी की है. नागरिकों को सुरक्षित शेल्टर में रहने और अगली सूचना तक सतर्क रहने की सलाह दी गई है. क्षेत्र में हवाई खतरों की रिपोर्ट मिलने के बाद यह एडवाइजरी जारी की गई.
तेल टैंकर हमला और भारतीयों की मौत
होर्मुज स्ट्रेट के पास तेल टैंकर ‘MT सेत्तेबेल्लो’ पर हुए हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि जहाज का भारतीय चीफ इंजीनियर अब भी लापता बताया जा रहा है.भारतीय दूतावास और ओमान के अधिकारी संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान चला रहे हैं.
तेल बाजार में उछाल
तनाव बढ़ने और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख बेंचमार्क में मजबूती देखने को मिली. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है.
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