Mehndi : मेहंदी का उपयोग हजारों साल पहले से किया जा रहा है. प्राचीन मिस्र और भारत के मुगल काल में भी इसका विशेष महत्व था. मेहंदी को शुभता, सौभाग्य और खुशहाल वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना गया है.
वैदिक मान्यताएं
वैदिक मान्यताओं में मेहंदी को प्रेम, समृद्धि और फर्टिलिटी से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि शादी से पहले दुल्हन के हाथों और पैरों पर सुंदर मेहंदी रचाने की परंपरा आज भी निभाई जाती है. मेहंदी में कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं जो त्वचा की देखभाल में मदद कर सकते हैं. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह त्वचा संबंधी कुछ समस्याओं से बचाव में सहायक मानी जाती है. इसके अलावा मेहंदी का उपयोग लंबे समय से शरीर को ठंडक पहुंचाने और सिरदर्द या थकान जैसी परेशानियों को कम करने के लिए भी किया जाता रहा है.
भारतीय संस्कृति
भारतीय संस्कृति में मेहंदी को शुभ माना जाता है. शादी के दौरान इसे दुल्हन के नए जीवन की खुशहाल शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मेहंदी के डिजाइनों में बने मोर, कमल और अन्य पारंपरिक आकृतियां प्रेम, सुंदरता, पवित्रता और समृद्धि का संदेश देती हैं. शादी की रस्मों में एक लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि दुल्हन की मेहंदी का रंग जितना गहरा चढ़ता है, पति और ससुराल वालों का प्यार उतना अधिक माना जाता है. हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन यह परंपरा आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है.
धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं में मेहंदी को फर्टिलिटी, प्रेम और अच्छे भाग्य का प्रतीक माना गया है. ऐसा विश्वास है कि इसकी लाल-भूरी रंगत नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है और नवविवाहित जोड़े के जीवन में सुख-समृद्धि लाती है. हालांकि आज के समय में मेहंदी को सिर्फ साज-सजावट का हिस्सा माना जाता है. जिसके कारण गाढ़े रंग के लिए इसमें केमिकल मिलाया जाने लगा है. यदि आपको मेहंदी के असली फायदे चाहिए तो सादे असली हेना की इस्तेमाल करें. इसके लिए आप मेहंदी के पत्ते को पीसकर कोन में भर सकते हैं. कलर को गाढ़ा करने के लिए इसमें आप नींबू का रस भी डाल सकते हैं.
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