West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर बगावत के सुर तेज हो गए हैं. पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की सक्रियता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.कई विधायकों के साथ उनकी लगातार बैठकों ने अटकलों को हवा दे दी है कि बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसी राजनीतिक पटकथा लिखी जा सकती है.सवाल यह है कि क्या ऋतब्रत बनर्जी टीएमसी के ‘एकनाथ शिंदे’बनकर उभरेंगे और क्या ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ा सियासी संकट खड़ा होने वाला है?
TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह
पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है.पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा लगातार टीएमसी विधायकों से संपर्क साध रहे हैं.हाल ही में कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में दोनों नेताओं की कई विधायकों से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है.पार्टी से निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि TMC के 50 विधायकों ने बैठक है वे चुनाव चिन्ह्र पर कब्जा करना चाहते हैं.
क्या बंगाल में दोहराई जाएगी महाराष्ट्र वाली पटकथा?
साल 2022 में महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था.अब बंगाल में भी वैसी ही स्थिति बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं.TMC की बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति और बाद में ऋतब्रत बनर्जी से उनकी मुलाकात ने इन चर्चाओं को और मजबूत कर दिया है.
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बढ़ रहा विरोध
पार्टी के कई नेता और विधायक टीएमसी की मौजूदा स्थिति के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.उन पर परिवारवाद,वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और पार्टी को कुछ सलाहकारों के भरोसे चलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं.कई नेताओं का मानना है कि 15 साल की सत्ता के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से दूर हो गई है.
निष्कासन के बाद और सक्रिय हुए ऋतब्रत
पार्टी से बाहर किए जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.उन्होंने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और पार्टी में I-PAC की भूमिका को लेकर भी आपत्ति जताई है.हालांकि उन्होंने पार्टी तोड़ने की किसी भी कोशिश से इनकार किया है,लेकिन उनकी लगातार बैठकों ने सियासी अटकलों को तेज कर दिया है.
ममता के सामने बढ़ता संगठनात्मक संकट
टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी और नेताओं के मोहभंग ने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी हैं.कई पार्षदों के इस्तीफे,नेताओं की नाराजगी और विधायकों की दूरी यह संकेत दे रही है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है.ऐसे में आने वाले दिनों में टीएमसी की अंदरूनी राजनीति बंगाल की सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है.



