The Kerala Story 2 Controversy:फिल्म ‘द केरल स्टोरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. इसी बीच फिल्म के प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से कोई विवाद नहीं है. मेरे हिसाब से, इस फिल्म में हमने जो सच्चाई दिखाने की कोशिश की है, उसके दो पक्ष हैं. एक उन पीड़ित लड़कियों का पक्ष है और दूसरा उन लोगों का जो इस क्राइम से जुड़े हुए हैं और हम जिनको क्रिमिनल नहीं, बल्कि टेररिस्ट कहते हैं. तो, यह बहुत सीधी-सी बात है. क्या आप पीड़ितों के साथ खड़े हैं? या आप उन टेररिस्ट को कवर फायर देना चाहते हैं? जो लोग कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होता, यह पूरी तरह से झूठी फिल्म है. पिछले डेढ़ से दो साल में, आप देखिए कि कितने बड़े-बड़े किस्से पकड़े गए. उत्तर प्रदेश में जलालुद्दीन, जिसे छांगुर बाबा कहते है, अभी वो जेल में है और उस पर आरोप है कि उसने 3,000 से 4,000 लड़कियों और लड़कों का धर्मांतरण किया.
“ऑडियंस समझ जाएगी कि सच क्या है”
प्रोड्यूसर ने कहा कि जब आपके पास लॉजिकल तर्क खत्म हो जाता है, तो आप नाम पुकारने लगते हैं. अगर लॉजिकल तर्क यह है कि यह फिल्म झूठी है, तो इसे साबित करना चाहिए. जैसे मैंने अभी आपको सारे उदाहरण दिए हैं और हमने जिन कहानियों को फिल्म में दिखाया है, उसके लिए भी हमारे पास सारे प्रमाण हैं जो हम दिखाने के लिए बिल्कुल तैयार हैं. तो जो लोग नाम पुकारने से बचते हैं और सबूत लाते हैं, तो बात समझ में आती है. लेकिन मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि हमारी ऑडियंस बहुत समझदार है और हमारी ऑडियंस बहुत स्मार्ट है. पहली फिल्म के समय भी वे इस प्रोपेगैंडा के मतलब को समझ लिया था और उन्होंने यह फिल्म बहुत बड़ी संख्या में देखी और उसको सराहा भी. मुझे ऐसी उम्मीद है कि इस बार भी ऑडियंस समझ जाएगी कि सच क्या है और असल में प्रोपेगैंडा कौन कर रहा है.
‘बीफ-पोरट्टा’ कहकर ट्रोल करने पर भी दी प्रतिक्रिया
‘द केरल स्टोरी 2’ के ट्रेलर को ‘बीफ-पोरट्टा’ कहकर ट्रोल करने पर उन्होंने कहा कि देखिए, मुझे बड़ा ताज्जुब होता है कि लोग एक सीक्वेंस का जो मुख्य मकसद है वो नहीं समझ पाते. मुझे एक बात बताइए, अगर उस लड़की को ज़बरदस्ती समोसा खिलाया गया होता, ऐसे ही पकड़कर, बांधकर ठूसा गया होता, तो क्या वो सही हो जाता है? बात बीफ की नहीं है, बात है कि एक लड़की के कैरेक्टर को किस तरह से तोड़ा जाता है. उसकी पूरी विल को कैसे खत्म किया जाता है. दूसरी बात यह है कि क्या केरल में रहने वाला हर हिंदू नॉन-वेजिटेरियन है? मैं शाकाहारी हूं, मुझे अगर कोई चिकन भी खिला देगा इस तरह, तो मेरे लिए वो उतना ही भयानक होगा, जितना किसी और इंसान के लिए बीफ है। तो, इतना बचकाना लेवल पर जाकर अगर लोग एक फिल्म की गहराई को समझे बिना अगर ट्रोल करते हैं, तो थोड़ा सा उन्हें सोचना चाहिए, कि क्या एक लड़की के ऊपर ज़बरदस्ती की जा सकती है?
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“फिल्म के खिलाफ कोई मजबूत आर्गुमेंट नहीं”
वहीं एक अन्य सवाल के जवाब में विपुल अमृतलाल शाह ने कहा कि देखिए, हर तरह की फिल्में बन रही हैं और अगर बीजेपी के पास इतना वक्त है कि वे एक फिल्म की स्क्रिप्ट तय करते हैं और उसे बनवाते लें, तो मुझे लगता है कि बीजेपी वाले काफी फ्री हैं, उनके पास बहुत समय है, अगर वे इस सब काम में शामिल हैं और अगर आप इसे इस तरह से देखें, तो हाल ही में ऐसी फिल्में बनी हैं, जिनमें हिंदुओं को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया है. तो अगर बीजेपी इन फिल्मों को कंट्रोल कर रही है, तो सेंसर बोर्ड ने उन फिल्मों को क्यों रोका? और उनमें से एक फिल्म, होमबाउंड, ऑस्कर तक भी गई है. तो अगर बीजेपी फिल्म इंडस्ट्री में शामिल थी और उसे कंट्रोल कर रही थी, तो होमबाउंड ऑस्कर में क्यों गई? कोई और फिल्म जानी चाहिए थी, जो बीजेपी के एजेंडा को आगे बढ़ाती. तो क्या हुआ, लोगों के पास इस फिल्म के खिलाफ कोई मजबूत आर्गुमेंट नहीं है.
टैक्स फ्री करने की मांग पर क्या बोले प्रोड्यूसर?
फिल्म के टैक्स फ्री करने की मांग पर प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह ने फिल्म के टैक्स फ्री करने की मांग पर कहा कि जी नहीं हम टैक्स फ्री या ऐसी कोई भी मांग नहीं करेंगे, क्योंकि फिर वही आक्षेप लगेंगे कि देखिए बीजेपी इस फिल्म को लेकर आई, तो इन्होंने टैक्स फ्री कर दिया. तो हमें टैक्स फ्री का कोई लाभ नहीं चाहिए, हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि पूरे परिवार के साथ लोग इस फिल्म को देखें, इस फिल्म की सच्चाई को देखें, मां, बाप, बेटी, बहन, भाई, सब मिलकर इस सच्चाई को देखें, ताकि वो एक सही फैसला अपनी जिंदगी के लिए कर पाए.



