US-Israel-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2 हफ्तों के लिए सीजफायर के ऐलान के बावजूद हमले जारी हैं. सीजफायर के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि लेबनान में इजरायल के हमलों में करीब 254 लोगों की मौत हो गई. जबकि 1165 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. लेबनान के पीएम नवाफ सलाम ने कहा ने कहा कि देश के सभी राजनीतिक और कूटनीतिक संसाधनों को जुटाकर इजरायली हमलों को रोकने की कोशिश की जा रही है. वही लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री रकान नासेरद्दीन ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है. दूसरी तरफ सीजफायर को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेंडी वेंस की तरफ से कहा गया है कि सीजफायर के समझौते में लेबनान शामिल नहीं है.
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका को तय करना होगा कि सीजफायर लागू करना है या इजरायल के जरिए जंग जारी रखता है, क्योंकि दोनों साथ नहीं चल सकते.
लेबनान की बमबारी की क्या हो सकती है वजह?
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उत्तरी इजरायल की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. लेबनान में सक्रिय हिजबुल्ला को ईरान से सपोर्ट मिलता है. नेतन्याहू सरकार का मानना है कि जब तक हिजबुल्ला के रॉकेट हमलों का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, विस्थापित इजरायली वापस अपने घरों को लौट नहीं जाते, जबतक हमले जारी रहेंगे. नेतन्याहू के पीछे न हटने की एक और वजह है. 1982 और 2006 में भी लेबनान को लेकर जल्दबाजी में फैसले लिए गए थे. अब नेतन्याहू पुरानी गलती को दोहराना नहीं चाहते.
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दक्षिणी लेबनान पर फिर हमला
दक्षिण लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है. हारूफ शहर पर हमले के बाद अब इजरायली सेना ने अल-दुवैर को भी निशाना बनाया है. अल जजीरा अरबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह ताजा हमला दक्षिण लेबनान में बढ़ते संघर्ष के बीच हुआ है. इससे पहले भी इस इलाके में कई हमले हो चुके हैं.



