KBP Times

क्या WhatsApp, UPI हो जाएगा बंद? ईरान की ‘डिजिटल टोल’ योजना बढ़ा सकती है दुनिया की टेंशन

Strait of Hormuz

Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट से आई एक खबर ने पूरी टेक दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. चर्चा इस बात की है कि ईरान अब उन अंडरसी इंटरनेट केबल्स पर अपना प्रभाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, जिनके जरिए दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट डेटा ट्रैफिक गुजरता है. फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे बिछी ये केबल्स एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ती हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान इन केबल्स से गुजरने वाले डिजिटल ट्रैफिक पर ‘डिजिटल टोल’ जैसा मॉडल लागू कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो इसका असर सिर्फ इंटरनेट स्पीड पर नहीं, बल्कि बैंकिंग, क्लाउड सर्विस, AI और ग्लोबल डिजिटल इकॉनमी पर भी पड़ सकता है.

इंटरनेट केबल्स पर बढ़ा जियोपॉलिकल तनाव
अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया तेल सप्लाई के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिनती थी, लेकिन अब यह इलाका डिजिटल दुनिया के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बन चुका है. समुद्र के नीचे बिछी कई हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक केबल्स इसी रूट से गुजरती हैं, जिनके जरिए एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी बनी रहती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान से जुड़े कुछ मीडिया नेटवर्क और IRGC से संबद्ध सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि इन केबल्स के इस्तेमाल से राजस्व कमाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. इसे “डिजिटल टोल बूथ” मॉडल कहा जा रहा है, जहां विदेशी नेटवर्क और टेक कंपनियों से शुल्क लिया जा सकता है.

दुनिया का ज्यादातर डेटा समुद्र के नीचे से गुजरता है
दुनिया का करीब 95 से 99 प्रतिशत इंटरनेट डेटा अंडरसी फाइबर केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है. ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, सोशल मीडिया, वीडियो कॉलिंग और AI सर्विसेज तक इसी नेटवर्क पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर किसी रणनीतिक क्षेत्र में मौजूद केबल्स पर तनाव बढ़ता है या उनका संचालन प्रभावित होता है, तो इसका असर कई देशों की डिजिटल सेवाओं पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेल और गैस की तरह जियोपॉलिकल दबाव का हथियार बन सकता है.

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान भविष्य में विदेशी टेक कंपनियों और नेटवर्क ऑपरेटर्स को स्थानीय नियमों का पालन करने के लिए बाध्य कर सकता है. इसके अलावा केबल्स की मरम्मत और मेंटेनेंस गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण की चर्चा भी सामने आई है. अगर ऐसा होता है, तो भारत समेत एशिया के कई देशों की इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है. इसका असर UPI पेमेंट, क्लाउड सर्वर, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और इंटरनेशनल डेटा ट्रांसफर पर भी देखने को मिल सकता है.

इंटरनेट भी बन सकता है नया जियोपॉलिटिकल हथियार
अब तक देशों के बीच तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार को लेकर दबाव की राजनीति होती थी, लेकिन आने वाले समय में इंटरनेट नेटवर्क भी वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा हिस्सा बन सकता है. यही वजह है कि अंडरसी इंटरनेट केबल्स अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति का अहम विषय बन चुके हैं.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में फिर बम धमाका, 9 लोगों की मौत, 23 घायल

ताजा खबरें

ताजा खबरें

farmers and moong

मूंग पर MSP नहीं मिलने से किसानों को करोड़ों का नुकसान, रामपाल जाट बोले- घोषित मूल्य दिलाना सरकारों का पवित्र धर्म

Home Minister Amit Shah

गृह मंत्री शाह बोले- PM मोदी ने ऐसी नीति बनाई कि आज दुश्मन भी डरता है

Rahul Post on dinner dimplomacy

राहुल का ‘भारत में 80 फीसदी लोग Non-Veg’ पोस्ट, रिजिजू ने कहा- राजनीति नहीं करें

Mayawati

मायावती बोलीं – मैं बीमार नहीं बिल्कुल ठीक, आकाश के दिमाग में अभी भी ससुर

trade loss in nepal for india

नेपाल में बाढ़ की आपदा; भारतीय पर्यटकों, निर्यातकों और ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक नुकसान

Termeric Milk

सोने से पहले क्यों हैं हल्दी वाला दूध पीने से फायदेमंद

khan sir

निखिल ने लगाया ‘खान सर’ पर लड़कियों के शोषण का आरोप, टीम बोली यह छवि बिगाड़ने की कोशिश

Foreign Investors withdrawl money

भारतीय शेयर मार्किट में फिर से विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की आग व डॉलर की मजबूती से घबराए

Exam today in ajmer

राज्य पात्रता परीक्षा-अभ्यर्थियों का ड्रेस कोड, एक घंटे पहले दी एंट्री

2

2