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LPG-तेल के बाद खतरे में इंटरनेट केबल्स, क्या ठप हो जाएगा Internet, भारत पर क्या होगा असर?

Internet Shutdown Risk

Internet Shutdown Risk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है. इसी बीच एक हैरान करने वाली बड़ी खबर सामने आई है. जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. दरअसल, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इंटरनेट केबल को लेकर चेतावनी जारी की है. जिसके अनुसार, फारस की खाड़ी में स्थित डिजीटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है. ईरानी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक स्ट्रेट ऑफ को तेल और जहाजों के लिए अहम रास्ता माना जाता था. लेकिन अब खतरा समुद्र के नीचे बिछे इंटरनेट केबल से जुड़ गया है. होर्मुज स्ट्रेट में मौजूद अंडरसी डेटा केबल काफी संवेदनशील हैं और इसमें किसी भी तरह की रुकावट पूरे इलाके की इंटरनेट सेवा पर बड़ा असर डाल सकती है. क्योंकि इससे कई केबल को नुकसान पहुंचता है और वह गलती से हो या जानबूझकर तो फारस की खाड़ी में बड़े स्तर पर इंटरनेट बंद हो सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट जलडमरूमध्य दुनिया में तेल की सप्लाई के लिए जितना जरूरी है, उतना ही इंटरनेट और डेटा के लिए भी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसके पानी के नीचे फाइबर-ऑप्टिक केबलों का एक घना जाल बिछा हुआ है, जो ग्लोबली कम्युनिकेशन के लिए रीढ़ की हड्डी की तरफ काम करता है. ये लाइनें रीजनल इंटरनेट ट्रैफिक का लगभग 17 प्रतिशत और 30 प्रतिशत हिस्सा संभालती है. यह एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को आपस में जोड़ता है.

क्या भारत पर भी पड़ेगा असर?
समुद्र के नीचे का यह नेटवर्क कई ऐसे देशों से बने लैंडिंग स्टेशनों से होकर गुजरता है, जहां अभी तक स्थिति गंभीर है. पाकिस्तान, ओमान और यूएई भी इसमें शामिल है. डेटा का इस्तेमाल करने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक होने के कारण भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था इन कनेक्शनों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. अगर किसी वजह से नेटवर्क बाधित होता है तो लाखों यूजर्स के लिए इंटरनेट की स्पीड कम हो सकती है, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल पेमेंट सिस्टम में दिक्कतें आ सकती है. भारत में बड़े IT और AI आधारित सेवाओं को आर्थिक नुकसान हो सकता है.

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असली खतरा या सिर्फ धमकी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ सीधी धमकी नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक सिग्रल भी है. अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी निशाना बन सकता है. हालांकि एक बड़ी बात यह भी है कि अगर ईरान केबल्स काटता है तो उसका खुद का इंटरनेट भी प्रभावित होगा.

 

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